विशेष अवकाश की मांग को लेकर शिक्षकों में नाराजगी

अवकाश के दौरान निर्वाचन और जनगणना कार्य में लगाए गए शिक्षकों ने विशेष अवकाश की मांग तेज कर दी है। शिक्षक संगठनों ने शासन से शीघ्र निर्णय लेने की अपील की है।

विशेष अवकाश की मांग को लेकर शिक्षकों में नाराजगी
HIGHLIGHTS:

• अवकाश के दौरान कराए गए कार्य के बदले विशेष अवकाश की मांग तेज हुई।

• निर्वाचन पुनरीक्षण और जनगणना कार्य में बड़ी संख्या में शिक्षक लगाए गए।

• शिक्षक संगठनों ने शासन से शीघ्र निर्णय लेकर राहत देने की मांग की।

इकरार/जन माध्यम

बरेली। अवकाश के दौरान विभिन्न सरकारी कार्यों में लगाए गए बेसिक शिक्षकों की विशेष अवकाश की मांग अब जोर पकड़ने लगी है। शिक्षकों का कहना है कि शीतकालीन और ग्रीष्मकालीन अवकाश के दौरान निर्वाचन पुनरीक्षण तथा जनगणना जैसे महत्वपूर्ण कार्यों में लगातार ड्यूटी ली गई, लेकिन अब तक इसके बदले विशेष अवकाश को लेकर कोई स्पष्ट निर्णय नहीं लिया गया है।

शिक्षक संगठनों के अनुसार 4 नवंबर 2025 से 10 अप्रैल 2026 तक विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर-2026) अभियान में बड़ी संख्या में शिक्षकों की ड्यूटी लगाई गई थी। इस दौरान शीतकालीन अवकाश भी कार्य में व्यतीत हो गया। शिक्षकों का कहना है कि रविवार और सार्वजनिक अवकाश के दिनों में भी उनसे कार्य लिया गया।

इसके बाद 20 मई से शुरू हुए ग्रीष्मकालीन अवकाश के दौरान अधिकांश शिक्षक और शिक्षिकाएं जनगणना के प्रथम चरण में लगाए गए हैं। यह कार्य 20 जून तक प्रस्तावित है, जिससे उनकी गर्मी की छुट्टियां भी प्रभावित हुई हैं।

शिक्षकों का कहना है कि अवकाश में कार्य लेने के बावजूद अभी तक जनपद या शासन स्तर से विशेष अथवा उपार्जित अवकाश दिए जाने का कोई आदेश जारी नहीं हुआ है। इससे शिक्षकों में मायूसी और नाराजगी बढ़ रही है।

शिक्षक संगठनों ने 24 सितंबर 2024 को जारी स्कूल शिक्षा विभाग के उस आदेश का भी हवाला दिया है, जिसमें अवकाश के दौरान कार्य करने वाले कर्मचारियों को उपार्जित अवकाश दिए जाने का उल्लेख किया गया था। उनका कहना है कि इस आदेश का प्रभावी अनुपालन होना चाहिए।

प्राथमिक शिक्षक संघ के वरिष्ठ शिक्षक नेता हरीश बाबू शर्मा ने कहा कि अवकाश के दौरान कार्य लेने पर विशेष अवकाश दिया जाना नियमसम्मत और तर्कसंगत मांग है। उन्होंने कहा कि शिक्षक समाज लंबे समय से इस संबंध में निर्णय की प्रतीक्षा कर रहा है और शासन को जल्द सकारात्मक कदम उठाना चाहिए।

शिक्षकों का मानना है कि यदि विभिन्न सरकारी कार्यों के लिए उनकी सेवाएं लगातार ली जा रही हैं, तो उनके अवकाश अधिकारों का भी सम्मान किया जाना चाहिए। अब उनकी निगाहें शासन और शिक्षा विभाग के अगले निर्णय पर टिकी हैं।