रोशनी ने दी दस्तक, उम्मीदों ने खोले दरवाज़े
तीन जिलों के लाखों उपभोक्ताओं को मिलेगा मजबूत बिजली ढांचे का तोहफा
130.81 करोड़ की मंजूरी से बदलेगी बिजली व्यवस्था की तस्वीर, चीफ इंजीनियर राम बाबू की मेहनत लाई रंग।
जहां कभी टिमटिमाते बल्बों के साथ उम्मीदें भी बुझ जाती थीं, वहां अब उजाले की नई दास्तान लिखी जाएगी।
मसूद उर रहमान/जन माध्यम
आजमगढ़। बिजली केवल तारों में दौड़ने वाली ऊर्जा नहीं होती, बल्कि यह उन सपनों की रोशनी भी होती है जो किसी छात्र की किताबों में चमकती है, किसी किसान के खेत में हरियाली बनकर लहलहाती है और किसी छोटे कारोबारी की दुकान में रोज़ी रोटी का चिराग जलाए रखती है। जब यह रोशनी कमजोर पड़ती है तो सिर्फ बल्ब नहीं बुझते, बल्कि हजारों उम्मीदें भी धुंधली होने लगती हैं। ऐसे में आजमगढ़ मंडल के लिए आई यह खबर किसी राहत से कम नहीं है।
बिजनेस प्लान 2026 27 के तहत शासन द्वारा 130.81 करोड़ रुपये की मंजूरी ने आजमगढ़, मऊ और बलिया के लाखों उपभोक्ताओं के दिलों में नई उम्मीद जगा दी है। यह महज एक सरकारी योजना नहीं, बल्कि उन घरों की मुस्कान का पैगाम है जो वर्षों से बेहतर बिजली व्यवस्था का इंतजार कर रहे थे।
इस महत्वाकांक्षी योजना के तहत तीन नए बिजली उपकेंद्र बनाए जाएंगे, 14 उपकेंद्रों की क्षमता बढ़ाई जाएगी, 20 नई 33 केवी लाइनें बिछाई जाएंगी और सैकड़ों ट्रांसफार्मरों को स्थापित एवं अपग्रेड किया जाएगा। इन कार्यों के पूरा होने के बाद बिजली व्यवस्था को नई मजबूती मिलेगी और उपभोक्ताओं को राहत का एहसास होगा। इस उपलब्धि के पीछे चीफ इंजीनियर राम बाबू की दूरदर्शी सोच और जनहित के प्रति समर्पण की चर्चा पूरे मंडल में हो रही है। कहा जाता है कि एक अच्छा अधिकारी केवल फाइलों में योजनाएं नहीं बनाता, बल्कि लोगों की परेशानियों को महसूस करके उनके समाधान का रास्ता भी तैयार करता है। राम बाबू ने भी यही किया। उन्होंने उन गांवों की तकलीफ को समझा, जहां गर्मी की रातों में बिजली गुल होते ही बेचैनी बढ़ जाती थी। उन्होंने उन किसानों की चिंता को महसूस किया, जिनकी फसलें बिजली की अनिश्चितता से प्रभावित होती थीं। उन्होंने उन बच्चों की मजबूरी को समझा, जिनकी पढ़ाई कई बार अंधेरे के हवाले हो जाती थी।
आज यही संवेदनशील सोच एक बड़ी मंजूरी के रूप में सामने आई है। यह योजना केवल खंभों, तारों और ट्रांसफार्मरों की कहानी नहीं है, बल्कि उन अनगिनत चेहरों की कहानी है जो बेहतर कल का सपना देख रहे हैं। मंडल के लोग उम्मीद कर रहे हैं कि जब ये परियोजनाएं पूरी होंगी तो गांवों की गलियों से लेकर शहरों की सड़कों तक विकास की नई रौशनी बिखरेगी। कारोबार को रफ्तार मिलेगी, किसानों को सहूलियत होगी और विद्यार्थियों के सपनों को नया आसमान मिलेगा। आजमगढ़, मऊ और बलिया के लिए यह मंजूरी किसी ईद की खुशखबरी और दीपावली के उजाले से कम नहीं। यह संदेश है कि अगर नीयत साफ हो, सोच व्यापक हो और प्रयास ईमानदार हों, तो विकास की किरण सबसे दूर बैठे इंसान तक भी पहुंच सकती है। चीफ इंजीनियर राम बाबू का यह प्रयास आने वाले वर्षों में सिर्फ बिजली व्यवस्था को नहीं, बल्कि लाखों लोगों की जिंदगी को भी रोशन करने का माध्यम बनेगा। क्योंकि असली विकास वही है, जो आंकड़ों में नहीं, बल्कि लोगों के चेहरों पर दिखाई देने वाली मुस्कान में नजर आए।