विद्यालय का गौरव, देश की शान

सरस्वती शिशु मन्दिर के पूर्व छात्र जनरल उपेंद्र द्विवेदी भारत के थल सेना अध्यक्ष बने, बच्चों से साझा किए अपने अनुभव और संस्कार।

विद्यालय का गौरव, देश की शान
HIGHLIGHTS:

➡️ सरस्वती शिशु मन्दिर का छात्र उपेंद्र द्विवेदी बने थल सेना अध्यक्ष
➡️ विद्यालय में बच्चों के साथ साझा किए बचपन के अनुभव
➡️ संस्कार, अनुशासन और राष्ट्रप्रेम को जीवन में मार्गदर्शक बताया
➡️ बच्चों को कक्षा-04 का रिपोर्ट कार्ड दिखाया
➡️ विद्या भारती और विद्यालय परिवार गर्वित
➡️ 30वें सेना प्रमुख के रूप में संभाला पदभार
➡️ उत्तरी कमान और IX कोर में महत्वपूर्ण सेवाएँ

जन माध्यम।
सरफराज़ खान। सैंथल (बरेली)।

विद्या भारती द्वारा संचालित सरस्वती शिशु मन्दिरों के छात्र आज देश के सर्वोच्च पदों पर पहुँचकर राष्ट्र निर्माण में अहम योगदान दे रहे हैं। इसी कड़ी में, सरस्वती शिशु मन्दिर सतना के पूर्व छात्र जनरल उपेंद्र द्विवेदी, पीवीएसएम, एवीएसएम ने हाल ही में भारत के थल सेना अध्यक्ष के रूप में पदभार संभाला।
विद्यालय पहुँचकर उन्होंने बच्चों के साथ अपने बचपन के अनुभव साझा किए और मार्गदर्शन दिया। उन्होंने कहा कि सरस्वती शिशु मन्दिर में सीखे गए संस्कार, अनुशासन, सम्मान, जिज्ञासा और राष्ट्रप्रेम उनके जीवन के मार्गदर्शक बने। उन्होंने बच्चों से अपील की कि वे कड़ी मेहनत करें, बड़े सपने देखें और अपने संस्कारों में अडिग रहें, तथा गर्व से देश की सेवा करें।

जनरल द्विवेदी ने बच्चों को अपने कक्षा-04 के रिपोर्ट कार्ड भी दिखाया और बताया कि ये ही संस्कार उन्हें आज इस महान पद तक लेकर आए। उनकी उपलब्धि पर विद्या भारती के पदाधिकारी और विद्यालय परिवार गर्व महसूस कर रहे हैं। जनरल उपेंद्र द्विवेदी 1 जुलाई 1964 को जन्मे और भारतीय सेना के चार सितारा अधिकारी हैं। वे वर्तमान में 30वें सेना प्रमुख हैं और इससे पहले 46वें उप सेना प्रमुख के रूप में कार्य कर चुके हैं। उन्होंने उत्तरी कमान, सेना स्टाफ सूचना प्रणाली और समन्वय है और IX कोर में महत्वपूर्ण पदों पर सेवा दी। सरस्वती शिशु मन्दिर ने अपने संस्कारों और शिक्षा के माध्यम से न केवल छात्रों को स्वावलंबी और नेतृत्वशील बनाया, बल्कि राष्ट्रहित में आत्मविश्वासी और जिम्मेदार नागरिक तैयार किए।