केसर चीनी मिल ने किसानों को समय से भुगतान
बहेड़ी केसर चीनी मिल ने नए सत्र का गन्ना भुगतान समय पर शुरू किया। 18 नवंबर तक खरीदे गन्ने के 1.95 करोड़ रुपये किसानों के खाते में जमा, CEO शरत मिश्रा का भरोसा!
➡️ केसर चीनी मिल: नए सत्र का गन्ना भुगतान समय पर शुरू
➡️ 18 नवंबर तक खरीदे गन्ने का पूरा 1.95 करोड़ रुपये किसानों के खाते में
➡️ पहली एडवाइज: 1.95 Cr + साक्षीप 2.0 Cr एस्क्रू में ट्रांसफर
➡️ CEO शरत मिश्रा: आगे भी समय पर और पारदर्शी भुगतान का वादा
➡️ किसानों से अपील: कोई समस्या हो तो तुरंत मिल प्रशासन से संपर्क करें
➡️ किसानों में खुशी: आर्थिक योजना आसान, नई फसल की तैयारी में मदद
➡️ मिल-किसान के बीच विश्वास और मजबूत
नए सत्र के गन्ने का 18 नवंबर तक का भुगतान खातों में पहुँचा
जन माध्यम
बहेड़ी। बरेली। केसर चीनी मिल ने नए पेराई सत्र के गन्ने का भुगतान किसानों के खातों में समयबद्ध तरीके से शुरू कर दिया है। मिल प्रबंधन ने 18 नवंबर तक खरीदे गए गन्ने का भुगतान किसानों के खातों में जमा कर दिया।केसर चीनी मिल के मुख्य कार्यकारिणी अधिकारी शरत मिश्रा ने बताया कि 20 नवंबर, को पहली एडवाइज के तहत 1.95 करोड़ रुपये का भुगतान किया गया। इसके साथ ही साक्षीप 2.0 करोड़ रुपये एस्क्रू खाते में भेजे गए हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि किसानों के खाते में अब तक खरीदे गए 18 नवंबर तक के गन्ने का कुल भुगतान 1.95 करोड़ रुपये जमा कराया जा चुका है।शरत मिश्रा ने कहा कि मिल का प्रयास रहेगा कि आने वाले दिनों में भी किसानों को गन्ने का भुगतान समय पर और पूरी पारदर्शिता के साथ किया जाए। उन्होंने किसानों से अपील की कि वे मिल प्रशासन के साथ सहयोग बनाए रखें और गन्ना क्रय एवं भुगतान की प्रक्रिया में किसी प्रकार की समस्या आने पर तुरंत मिल प्रबंधन से संपर्क करें।
मिल के अधिकारियों ने यह भी कहा कि किसानों की मेहनत और योगदान को ध्यान में रखते हुए भुगतान प्रक्रिया को शीघ्र और सुव्यवस्थित करने का प्रयास किया जा रहा है। इससे न केवल किसानों का विश्वास बढ़ेगा, बल्कि गन्ना उद्योग में पारदर्शिता और स्थिरता भी सुनिश्चित होगी।किसानों ने मिल के इस निर्णय की सराहना की और कहा कि समय पर भुगतान मिलने से उनकी आर्थिक योजना में आसानी होगी और उन्हें नई फसल की तैयारी में मदद मिलेगी। इस प्रकार के पहल से किसान और मिल प्रशासन के बीच विश्वास और सहयोग की भावना और मजबूत होगी।केसर चीनी मिल का यह कदम किसानों के हितों और कृषि क्षेत्र में समग्र विकास की दिशा में एक सकारात्मक उदाहरण के रूप में देखा जा रहा है।