निजी अस्पतालों पर छापा, गंदगी और फर्जीवाड़ा उजागर
बरेली में सीएमओ के छापे में निजी अस्पतालों की लापरवाही उजागर। गंदगी, अवैध संचालन और आयुष्मान योजना के दुरुपयोग के मामले सामने आए।
सीएमओ के छापे में खुली अस्पतालों की पोल
बिना अनुमति नए भवन में चल रहा अस्पताल
बायोमेडिकल कचरा खुले में, गंदगी का अंबार
आयुष्मान योजना के दुरुपयोग का मामला
हसीन दानिश । जन माध्यम
बरेली। इलाज के नाम पर भरोसा और उसी भरोसे के साथ खिलवाड़। बरेली के निजी अस्पतालों की हकीकत तब सामने आई, जब सीएमओ ने अचानक छापा मारा और जो देखा, वह चौंकाने वाला था।
मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) डॉ. विश्राम सिंह की कार्रवाई में तीन निजी अस्पतालों में गंभीर अनियमितताएं पकड़ी गईं। कहीं सफाई का नामोनिशान नहीं था, तो कहीं बायोमेडिकल कचरा खुले में पड़ा मिला। इतना ही नहीं, एक अस्पताल बिना अनुमति नए भवन में चल रहा था और आयुष्मान योजना का भी खुलकर दुरुपयोग किया जा रहा था।
सबसे बड़ा मामला अल हिंद अस्पताल का सामने आया, जहां पुराने भवन से बिना अनुमति लिए अस्पताल को नए भवन में शिफ्ट कर दिया गया। हैरानी की बात यह रही कि नए स्थान पर पंजीकरण तक नहीं कराया गया, फिर भी मरीजों का इलाज जारी था। मौके पर मौजूद संचालक डॉ. मोईन कोई संतोषजनक जवाब नहीं दे सके।
आला हजरत अस्पताल एंड सर्जिकल सेंटर की स्थिति और भी गंभीर मिली। अस्पताल परिसर में चारों ओर गंदगी फैली हुई थी और बायोमेडिकल वेस्ट का सही निस्तारण नहीं किया जा रहा था। यह सीधे तौर पर मरीजों और स्टाफ के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ था।
सबसे चौंकाने वाला मामला आयुष्मान योजना से जुड़ा सामने आया, जहां एक सामान्य स्थिति वाले मरीज को बिना जरूरत आईसीयू में भर्ती कर दिया गया। आशंका है कि अधिक क्लेम पाने के लिए यह कदम उठाया गया।
सीएमओ डॉ. विश्राम सिंह ने सभी अस्पतालों को कारण बताओ नोटिस जारी कर सख्त चेतावनी दी है। उन्होंने दो टूक कहा “स्वास्थ्य सेवाओं में किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। निजी अस्पताल मरीजों की जान से खिलवाड़ नहीं कर सकते।”
यह कार्रवाई एक बड़ा सवाल खड़ा करती है क्या इलाज अब सेवा नहीं, बल्कि सिर्फ कमाई का जरिया बन गया है?
अब देखना यह होगा कि नोटिस के बाद क्या वाकई सुधार होगा, या फिर कार्रवाई सिर्फ कागजों तक सीमित रह जाएगी।