जब ठंड के खिलाफ प्रशासन बना ढाल
बरेली के सैंथल कस्बे में डीएम के निर्देश पर सर्दी राहत योजना के तहत कंबल वितरण किया गया। नायब तहसीलदार शोभित चौधरी के नेतृत्व में गरीब, बुजुर्ग और बेघरों तक प्रशासनिक संवेदना पहुंची।
➡️ डीएम के निर्देश पर सैंथल में कंबल वितरण
➡️ नायब तहसीलदार शोभित चौधरी के नेतृत्व में अभियान
➡️ गरीब, मजदूर, बुजुर्ग और बेघरों को राहत
➡️ अलाव और रैन बसेरों का मौके पर निरीक्षण
➡️ कमियों पर तत्काल सुधार के निर्देश
➡️ कागजों से निकलकर ज़मीन पर उतरी सर्दी राहत योजना
सरफरीज़ खान/ जन माध्यम
बरेली। जब सर्दी हड्डियों तक उतरने लगे और रातें गरीबों के लिए इम्तिहान बन जाएं, तब अगर शासन-प्रशासन समय पर हाथ थाम ले, तो राहत सिर्फ कंबल नहीं, भरोसा बन जाती है। कुछ ऐसा ही दृश्य रविवार, 21 दिसंबर 2025, को बरेली जिले की नवाबगंज तहसील के सैंथल कस्बे में देखने को मिला, जहां जिलाधिकारी के स्पष्ट निर्देशों पर प्रशासन ने इंसानियत की गरमाहट बांटी।
नायब तहसीलदार शोभित चौधरी के नेतृत्व में सैंथल कस्बे के गरीब, असहाय और जरूरतमंद परिवारों को कंबल वितरित किए गए। यह अभियान उत्तर प्रदेश सरकार की सर्दी राहत योजना के तहत चलाया जा रहा है, जिसका उद्देश्य ठंड के प्रकोप से सबसे कमजोर वर्ग को सुरक्षित रखना है। मजदूर, बुजुर्ग, बेसहारा और बेघर लोगों को जब प्रशासन के हाथों कंबल मिला, तो उनकी आंखों में सिर्फ राहत नहीं, बल्कि सम्मान भी झलक रहा था।
नायब तहसीलदार शोभित चौधरी ने स्पष्ट किया कि यह वितरण डीएम बरेली के निर्देशों के अनुपालन में किया गया है। उन्होंने कहा कि सर्दी में कोई भी जरूरतमंद ठंड से जूझता न रह जाए, यही प्रशासन की प्राथमिकता है। कंबल वितरण के साथ-साथ उन्होंने कस्बे में लगाए गए अलावों का निरीक्षण भी किया और यह सुनिश्चित किया कि रात के समय लोगों को पर्याप्त गर्माहट मिल सके।
इतना ही नहीं, रैन बसेरा सुविधाओं की भी बारीकी से जांच की गई। जहां कमियां नजर आईं, वहां तत्काल सुधार के निर्देश दिए गए, ताकि ठंड में खुले आसमान के नीचे सोने को मजबूर लोग सुरक्षित स्थान पा सकें। यह साफ संदेश था कि राहत सिर्फ रस्म नहीं, जिम्मेदारी है।
इस मानवीय पहल में नगर पंचायत के अधिशासी अधिकारी, सफाई नायक रईस हैदर सहित अन्य कर्मचारी भी मौके पर मौजूद रहे। सभी ने मिलकर वितरण प्रक्रिया को व्यवस्थित और पारदर्शी ढंग से पूरा कराया।
प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार, जिले में इस सर्दी कुल 6185 कंबल उपलब्ध हैं और लगातार विभिन्न तहसीलों में वितरण किया जा रहा है। सैंथल में हुआ यह वितरण उसी कड़ी का हिस्सा है। यदि मौसम और ज्यादा सख्त हुआ, तो अतिरिक्त अलाव लगाने और सुविधाएं बढ़ाने की भी योजना तैयार है।
स्थानीय लोगों ने इस पहल की खुले दिल से सराहना की है। कस्बे में चर्चा है कि इस बार प्रशासन सिर्फ निर्देश नहीं दे रहा, बल्कि खुद मैदान में उतरकर हालात देख रहा है। हालांकि, कुछ जरूरतमंदों ने कंबलों की संख्या और बढ़ाने की मांग भी रखी है, जिसे प्रशासन ने गंभीरता से लेने का भरोसा दिलाया है।
कुल मिलाकर, सैंथल में हुआ यह कंबल वितरण एक संदेश छोड़ गया—
जब प्रशासन संवेदनशील हो, तो ठंड भी हार मानने लगती है,
और गरीब के लिए सरकार सिर्फ नाम नहीं, सहारा बन जाती है।