मेरठ: सीएचसी माछरा पहुंचे डीएम डॉ. वी.के. सिंह; दवाइयों की एक्सपायरी जांची
मेरठ के जिलाधिकारी डॉ. वी.के. सिंह ने सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र माछरा का औचक निरीक्षण किया। उन्होंने ओपीडी, डिलीवरी कक्ष और दवाओं के स्टॉक की जांच करते हुए केवल अस्पताल में उपलब्ध दवाएं लिखने के निर्देश दिए।
जिलाधिकारी डॉ. वी.के. सिंह ने बिना किसी पूर्व सूचना के माछरा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंचकर चिकित्सा व्यवस्थाओं को खंगाला।
डॉक्टरों को सख्त हिदायत-मरीजों को केवल वही दवाएं लिखी जाएं जो सरकारी अस्पताल के स्टॉक में हों, बाहर की पर्ची बर्दाश्त नहीं होगी।
दवा वितरण कक्ष में स्टॉक चेक करते हुए निर्देश दिया कि कोई भी ऐसी दवा न रखी जाए जिसकी एक्सपायरी अवधि 6 महीने से कम बची हो ।
जन माध्यम
मेरठ। ग्रामीण अंचल के नागरिकों को सरकारी अस्पतालों में बेहतर और गुणवत्तापूर्ण चिकित्सा सुविधाएं मुहैया कराने के उद्देश्य से जिलाधिकारी डॉ. वी.के. सिंह ने मंगलवार को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र माछरा का औचक निरीक्षण किया। जिलाधिकारी के इस अचानक हुए दौरे से अस्पताल परिसर और स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों में हड़कंप मच गया। निरीक्षण के दौरान डीएम ने स्वास्थ्य केंद्र की हर छोटी-बड़ी व्यवस्था की गहनता से पड़ताल की।
जिलाधिकारी ने सबसे पहले अस्पताल के मुख्य पंजीकरण कक्ष और ओपीडी का रुख किया। उन्होंने डॉक्टरों और पैरामेडिकल स्टाफ की उपस्थिति पंजिका का मिलान ऑन-ड्यूटी कर्मचारियों से किया। इसके बाद वे दवा वितरण कक्षा पहुंचे, जहां उन्होंने दवाओं की उपलब्धता के साथ-साथ उनके बैच नंबर और एक्सपायरी डेट की बारीकी से जांच की। उन्होंने फार्मासिस्ट को कड़े निर्देश दिए कि अस्पताल में केवल वही दवाएं स्टॉक में रखी जाएं, जिनकी एक्सपायरी अवधि कम से कम अगले 6 महीने बाद की हो।
तस्वीर में साफ देखा जा सकता है कि जिलाधिकारी डॉ. वी.के. सिंह अस्पताल के काउंटर पर खड़े होकर बेहद गंभीर मुद्रा में रिकॉर्ड और पंजिकाओं का निरीक्षण कर रहे हैं। उनके ठीक पीछे अपर जिलाधिकारी सत्य प्रकाश सिंह और माछरा स्वास्थ्य केंद्र के प्रभारी चिकित्सा अधिकारी व डॉक्टर फाइलें और रजिस्टर प्रस्तुत करते नजर आ रहे हैं।
मातृ-शिशु सुरक्षा को लेकर संवेदनशील नजर आए डीएम ने डिलीवरी कक्ष (प्रसव वार्ड) का निरीक्षण किया और वहां तैनात स्टाफ से हर महीने होने वाली डिलीवरी के आंकड़ों की विस्तृत जानकारी मांगी। उन्होंने टीकाकरण कक्ष, भर्ती मरीजों के वार्ड (इन्डोर वार्ड), साफ-सफाई और शौचालयों की स्थिति को भी देखा। वार्डों में भर्ती मरीजों के बेड पर जाकर डीएम ने उनका हालचाल जाना और उनके साथ मौजूद तीमारदारों से पूछा कि क्या उन्हें अस्पताल से समय पर मुफ्त दवाएं और भोजन मिल रहा है या नहीं।
अस्पतालों में अक्सर बाहर की दवाएं लिखे जाने की शिकायतों को संज्ञान में लेते हुए जिलाधिकारी ने डॉक्टरों को अंतिम चेतावनी जारी की। उन्होंने स्पष्ट लहजे में निर्देश दिया कि कोई भी डॉक्टर मरीज को बाहर की दवा नहीं लिखेगा। नुस्खे में वही दवा लिखी जाए जो सरकारी स्टोर में उपलब्ध हो, यदि वह सॉल्ट न हो तो उसकी जगह उपलब्ध कोई अन्य वैकल्पिक दवा दी जाए।
डीएम ने कहा कि दूर-दराज से गरीब मरीज यहां बेहतर उपचार और अच्छी दवा की उम्मीद लेकर आते हैं, उन्हें हर हाल में सरकार की योजनाओं का लाभ मिलना चाहिए। व्यवस्थाओं को और अधिक जनहितकारी बनाने के इस अभियान में उनके साथ अपर जिलाधिकारी प्रशासन सत्य प्रकाश सिंह सहित जिले के कई आला प्रशासनिक और स्वास्थ्य अधिकारी मौजूद रहे।