आगरा रेल मंडल में बड़ा अभियान, बचाए गए साठ मासूम बच्चे
आगरा रेल मंडल में सुरक्षा बल ने चलाया बड़ा अभियान। मथुरा और आगरा समेत विभिन्न स्टेशनों से बचाए गए साठ मासूम बच्चे।
रेलवे सुरक्षा बल ने जनवरी से मई तक विशेष अभियान चलाकर साठ पीड़ित बच्चों को सकुशल बचाया।
बचाए गए बच्चों में पैंतीस लड़के और पच्चीस लड़कियां शामिल, जिन्हें विभिन्न स्टेशनों से रेस्क्यू किया गया।
मथुरा जंक्शन से सबसे अधिक चौदह लड़के और छह लड़कियों को सुरक्षित बचाकर परिजनों से मिलाया गया।
घर से भागे, लापता और बेघर बच्चों की सुरक्षा को लेकर सुरक्षा बल का यह अभियान लगातार जारी।
श्याम बिहारी भारगव / जन माध्यम
मथुरा। आगरा रेल मंडल में रेलवे सुरक्षा बल ने मासूम बच्चों की सुरक्षा और उनके पुनर्वास के लिए एक बेहद सराहनीय मानवीय पहल की है। मंडल रेल प्रबंधक के निर्देशन और वरिष्ठ मंडल सुरक्षा आयुक्त के मार्गदर्शन में सुरक्षा बल ने एक विशेष अभियान के तहत कई मासूम जिंदगियों को अंधकार में जाने से बचा लिया। रात-दिन मुस्तैद रहने वाले जवानों की सतर्कता के कारण रेलवे स्टेशनों पर लावारिस और असुरक्षित घूम रहे बच्चों को नया जीवन मिल रहा है।
सुरक्षा बल द्वारा दी गई आधिकारिक जानकारी के अनुसार, चालू वर्ष में जनवरी से लेकर मई महीने तक चलाए गए इस विशेष अभियान के तहत कुल साठ पीड़ित बच्चों को सुरक्षित बचाया गया है। इनमें पैंतीस लड़के और पच्चीस लड़कियां शामिल हैं। आंकड़ों के मुताबिक, मथुरा जंक्शन और आगरा किला स्टेशन से सबसे अधिक चौदह-चौदह लड़कों को रेस्क्यू किया गया है। इसके अलावा आगरा छावनी, अछनेरा, धौलपुर और कोसीकलां स्टेशनों पर भी सुरक्षा दल ने मुस्तैदी दिखाते हुए भटके हुए मासूमों को अपनी कस्टडी में लिया।
सुरक्षा बल के अधिकारियों के अनुसार, बचाए गए इन बच्चों में कई ऐसे थे जो अपने घरों से बिना बताए भाग आए थे, कुछ लापता थे, तो कुछ मानसिक रूप से अस्वस्थ और बेघर स्थिति में पाए गए। रेलवे स्टेशनों पर संदिग्ध रूप से घूमते समय जवानों की नजर इन पर पड़ी। सुरक्षा बल ने न केवल इन बच्चों को असामाजिक तत्वों के चंगुल में फंसने से बचाया, बल्कि उनके परिजनों और बाल कल्याण संस्थाओं से संपर्क साधकर उन्हें सुरक्षित हाथों में सौंपने की कानूनी प्रक्रिया भी पूरी की।
इस विशेष मानवीय अभियान के माध्यम से रेलवे सुरक्षा बल लगातार आम जनता और रेल यात्रियों के बीच भी जागरूकता बढ़ा रहा है, ताकि घर से भागे या भटके हुए बच्चों की दुर्दशा को रोका जा सके। रेलवे प्रशासन का कहना है कि स्टेशनों पर बच्चों की सुरक्षा को लेकर चौकसी और ज्यादा बढ़ा दी गई है। अब इस सफल कार्रवाई के बाद पीड़ित बच्चों के पुनर्वास और उनकी काउंसलिंग पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है ताकि वे दोबारा ऐसी स्थिति में न आएं।