कबीर जयंती पर विचार गोष्ठी आयोजित
अखिल भारतीय साहित्य परिषद, बरेली ने संत कबीर जयंती पर विचार गोष्ठी आयोजित की। वक्ताओं ने कबीर के साहित्य, सामाजिक समरसता और मानवता के संदेश पर प्रकाश डाला।
साहित्य परिषद ने संत कबीर जयंती पर विचार गोष्ठी आयोजित की।
वक्ताओं ने कबीर को समाज सुधारक और क्रांतिकारी संत बताया।
मानवता, सामाजिक समरसता और प्रेम के संदेश पर विस्तार से चर्चा हुई।
जन माध्यम
बरेली। अखिल भारतीय साहित्य परिषद, ब्रज प्रांत बरेली की ओर से संत कबीर जयंती के उपलक्ष्य में जनपदीय उपाध्यक्ष सरदार गुरविंदर सिंह के मॉडल टाउन स्थित आवास पर विचार गोष्ठी आयोजित की गई। कार्यक्रम की अध्यक्षता जनपदीय अध्यक्ष डॉ. व्रजेश कुमार शर्मा ने की, जबकि संचालन गुरविंदर सिंह ने किया।
कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्ज्वलन एवं संत कबीर के चित्र पर माल्यार्पण के साथ हुआ। इस अवसर पर मोहन चंद्र पाण्डेय ने सरस्वती वंदना प्रस्तुत की, जबकि साहित्य परिषद के प्रांतीय कोषाध्यक्ष एवं वरिष्ठ संगीतकार उमेश चंद्र गुप्ता ने अभिनंदन गीत प्रस्तुत कर वातावरण को भक्तिमय बना दिया।
मुख्य वक्ता एवं साहित्य परिषद के प्रांतीय अध्यक्ष डॉ. सुरेश बाबू मिश्रा ने कहा कि संत कबीर निर्गुण भक्ति धारा के प्रमुख कवि होने के साथ-साथ युगदृष्टा और क्रांतिदृष्टा समाज सुधारक थे। उन्होंने अपने साहित्य के माध्यम से अंधविश्वास, छुआछूत, ऊंच-नीच और सामाजिक कुरीतियों का विरोध करते हुए मानव प्रेम, समानता और सामाजिक समरसता का संदेश दिया।
डॉ. अखिलेश कुमार गुप्ता ने कहा कि कबीर मूर्तिपूजा, पशु बलि और हिंसा के विरोधी थे तथा उन्होंने अपनी वाणी से समाज को एकता के सूत्र में जोड़ने का प्रयास किया। अध्यक्षीय संबोधन में डॉ. व्रजेश कुमार शर्मा ने कबीर को निडर समाज सुधारक बताते हुए कहा कि उन्होंने धार्मिक आडंबरों और मिथ्या परंपराओं का खुलकर विरोध किया।
कार्यक्रम में उमेश चंद्र गुप्ता, प्रमोद कुमार मिश्रा, ओम प्रकाश अरोरा, मोहन चंद्र पाण्डेय, बलवंत कौर, निरुपमा अग्रवाल, महेंद्र पाल राही, आर.पी. सिंह, टी.पी. शर्मा और संजय सारस्वत सहित अनेक साहित्यप्रेमी उपस्थित रहे। अंत में कार्यक्रम संयोजक गुरविंदर सिंह ने सभी अतिथियों का आभार व्यक्त किया।