रामगंगा किनारे खनन का ग्रामीणों ने किया विरोध

बरेली में रामगंगा नदी किनारे हो रहे खनन के विरोध में ऐना, माधौपुर खालसा और रूपपुर के ग्रामीण डीएम कार्यालय पहुंचे। ग्रामीणों ने खनन अनुमति निरस्त करने और गांवों को कटाव से बचाने की मांग की।

रामगंगा किनारे खनन का ग्रामीणों ने किया विरोध
रामगंगा किनारे खनन का ग्रामीणों ने किया विरोध
रामगंगा किनारे खनन का ग्रामीणों ने किया विरोध
HIGHLIGHTS:

रामगंगा नदी किनारे खनन के खिलाफ ग्रामीणों का विरोध

ऐना, माधौपुर खालसा और रूपपुर के लोग पहुंचे डीएम कार्यालय

खनन से गांवों के दोबारा कटने का जताया खतरा

अनुमति निरस्त कर भविष्य में खनन पर रोक लगाने की मांग

जन माध्यम

बरेली। रामगंगा के किनारे बसे गांवों के लोगों के लिए यह नदी कभी जीवन का सहारा रही, तो कभी दर्द का कारण बन गई। कई बार बाढ़ में अपने घर और खेत बहते देख चुके ग्रामीणों के दिल में अब फिर वही डर लौट आया है, और इसी डर ने उन्हें प्रशासन के दरवाजे तक पहुंचा दिया।

खनन के विरोध में डीएम कार्यालय पहुंचे ग्रामीण
रामगंगा नदी किनारे हो रहे खनन को लेकर ग्राम ऐना, माधौपुर खालसा और रूपपुर के ग्रामीणों ने जिलाधिकारी कार्यालय पहुंचकर जोरदार विरोध जताया। ग्रामीणों ने प्रशासन को ज्ञापन सौंपते हुए खनन की अनुमति तत्काल निरस्त करने की मांग की। उनका आरोप है कि खनन कारोबारी परमिशन की आड़ में नदी किनारे अवैध खनन कर रहे हैं, जिससे आसपास के गांवों पर खतरा मंडराने लगा है।

बाढ़ में कई बार कट चुके हैं गांव
ग्रामीणों ने बताया कि उनके गांव रामगंगा नदी के किनारे बसे हुए हैं और बाढ़ प्रभावित क्षेत्र में आते हैं। बीते वर्षों में बाढ़ के कारण गांव तीन-तीन बार कट चुके हैं, जिससे लोगों को भारी नुकसान झेलना पड़ा। ग्रामीणों का कहना है कि यदि वर्तमान में चल रहा खनन इसी तरह जारी रहा तो नदी का बहाव गांवों की ओर मुड़ सकता है और एक बार फिर गांवों के कटने की आशंका बढ़ जाएगी। उन्होंने कहा कि यदि ऐसा हुआ तो उनके पास बसने के लिए कोई दूसरी जमीन भी नहीं है।

नदी किनारे गहरे गड्ढे बनाने का आरोप
ग्रामीणों ने खनन कारोबारियों पर आरोप लगाया कि उन्होंने परमिशन की आड़ में रामगंगा नदी के किनारे सात से आठ फीट गहरे और कई बीघा क्षेत्र में तालाबनुमा बड़े-बड़े गड्ढे बना दिए हैं। इससे नदी का प्राकृतिक बहाव प्रभावित होने का खतरा बढ़ गया है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय रहते इस पर रोक नहीं लगाई गई तो आने वाले समय में बड़ा संकट खड़ा हो सकता है।

लेखपाल की मदद से रुकवाया था खनन कार्य
गांव के लोगों ने बताया कि संभावित खतरे को देखते हुए उन्होंने 23 फरवरी 2026 को क्षेत्रीय लेखपाल के सहयोग से खनन कार्य रुकवा दिया था। इसके बाद से फिलहाल वहां खनन नहीं हो रहा है। ग्रामीणों का यह भी कहना है कि रामगंगा किनारे जाने के लिए कोई सरकारी रास्ता नहीं है और खेती के काम के लिए उन्होंने अपने खेतों में निजी रास्ते बना रखे हैं। आरोप है कि खनन कारोबारी इन्हीं निजी रास्तों से जबरन खनन करना चाहते हैं।

ग्रामीणों ने जिलाधिकारी से मांग की है कि यदि खनन कारोबारियों ने तथ्यों को छिपाकर किसी घाट की अनुमति प्राप्त की है तो उसे तत्काल प्रभाव से निरस्त किया जाए। साथ ही ग्राम ऐना, रूपपुर और माधौपुर खालसा की भूमि में भविष्य में किसी भी प्रकार की खनन अनुमति न दी जाए और निजी रास्तों से खनन कराने पर रोक लगाने के निर्देश संबंधित अधिकारियों को दिए जाएं। इस दौरान डीएम कार्यालय में तीनों गांवों के काफी संख्या में ग्रामीण मौजूद रहे।