कैनविज महाघोटाला: बरेली में निवेशकों का फूटा गुस्सा; सिटी मजिस्ट्रेट को सौंपा ज्ञापन, 15 जून से आमरण अनशन की चेतावनी

कैनविज क्रेडिट कोऑपरेटिव कंपनी में करोड़ों रुपये फंसने से नाराज निवेशकों ने बरेली कलेक्ट्रेट में प्रदर्शन किया। सिटी मजिस्ट्रेट को ज्ञापन सौंपकर SIT जांच की रिपोर्ट सार्वजनिक करने और 15 जून से अनशन की चेतावनी दी।

कैनविज महाघोटाला: बरेली में निवेशकों का फूटा गुस्सा; सिटी मजिस्ट्रेट को सौंपा ज्ञापन, 15 जून से आमरण अनशन की चेतावनी
HIGHLIGHTS:

आर-पार की जंग: डूबी रकम वापस न मिलने से आहत निवेशकों ने प्रशासन को दिया अल्टीमेटम; 15 जून से कलेक्ट्रेट में बेमियादी आमरण अनशन का ऐलान।

SIT जांच पर सवाल: पीड़ितों की मांग—विशेष जांच दल (SIT) की अब तक की कार्रवाई और दर्ज मुकदमों की प्रगति रिपोर्ट को सार्वजनिक करे प्रशासन।

धमकी मिलने का आरोप: 22 महीने में पैसा दोगुना करने का झांसा देने वाले एजेंटों पर पीड़ितों ने अब रकम मांगने पर जान से मारने की धमकी देने का लगाया आरोप।

जन माध्यम बरेली। कैनविज क्रेडिट कोऑपरेटिव कंपनी द्वारा निवेश के नाम पर किए गए कथित करोड़ों रुपये के महाघोटाले को लेकर पीड़ितों का धैर्य अब पूरी तरह जवाब दे गया है। लंबे समय से अपनी मेहनत की गाढ़ी कमाई वापस पाने के लिए भटक रहे सैकड़ों निवेशकों का आक्रोश मंगलवार को बरेली कलेक्ट्रेट परिसर में खुलकर सामने आ गया। आक्रोशित पीड़ितों ने जिलाधिकारी को संबोधित एक तीखा ज्ञापन सिटी मजिस्ट्रेट को सौंपकर विशेष जांच दल (SIT) की कार्रवाई पर स्थिति स्पष्ट करने की मांग की। साथ ही साफ शब्दों में चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों पर समयबद्ध कार्रवाई नहीं हुई, तो 15 जून से कलेक्ट्रेट में बेमियादी धरना और आमरण अनशन शुरू किया जाएगा।

ग्रामीण और मध्यमवर्गीय परिवारों को बनाया गया शिकार

पीड़ितों की ओर से मुखरता से आवाज उठा रहे सुरेंद्र कुमार ने कंपनी प्रबंधन पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि कैनविज के संचालकों और शातिर एजेंटों ने सोची-समझी साजिश के तहत ग्रामीण इलाकों और मध्यमवर्गीय परिवारों को निशाना बनाया था। उन्हें कम समय में मोटी रकम और आकर्षक ब्याज का लालच देकर करोड़ों रुपये निवेश करा लिए गए। सुरेंद्र कुमार का दावा है कि यह घोटाला मीडिया में चल रहे आंकड़ों से कहीं ज्यादा बड़ा हो सकता है। उन्होंने कहा कि आर्थिक तंगी और मानसिक तनाव के चलते कई निवेशकों के परिवार आज तबाह होने की कगार पर पहुंच गए हैं।

तस्वीर में साफ तौर पर देखा जा सकता है कि कलेक्ट्रेट परिसर में कड़े प्रशासनिक पहरे के बीच पीड़ितों का एक बड़ा हुजूम इकट्ठा है। सुरेंद्र कुमार और सामाजिक कार्यकर्ता डॉ. के.पी. सिंह के नेतृत्व में पीड़ित पुरुष और महिलाएं सिटी मजिस्ट्रेट के समक्ष अपनी आपबीती सुनाते हुए ज्ञापन की प्रति सौंप रहे हैं। पीड़ितों के चेहरों पर अपनी जीवन भर की पूंजी डूबने का दर्द और प्रशासनिक सुस्ती के खिलाफ आक्रोश साफ दिखाई दे रहा है।

"पैसा मांगा तो बाउंस हुए चेक, अब मिल रही हैं धमकियां"

एक अन्य पीड़िता सपना सिंह ने रोते हुए अपने साथ हुई धोखाधड़ी की कहानी बयां की। उन्होंने आरोप लगाया कि कंपनी के एजेंटों ने उनके परिवार और रिश्तेदारों को यह झांसा दिया था कि 22 महीने में रकम दोगुनी हो जाएगी और हर महीने तय ब्याज मिलेगा। लेकिन हकीकत तब सामने आई जब निवेश के बदले कंपनी द्वारा दिए गए सिक्योरिटी चेक बैंकों में बाउंस होने लगे। सपना सिंह का आरोप है कि अब जब वे अपनी फंसी हुई बड़ी धनराशि वापस मांगती हैं, तो उन्हें केवल झूठे आश्वासन दिए जाते हैं और विरोध करने पर कंपनी से जुड़े रसूखदार लोग उन्हें और उनके परिवार को धमकियां दे रहे हैं।

15 जून से कलेक्ट्रेट बनेगा आंदोलन का अखाड़ा: डॉ. के.पी. सिंह

इस आंदोलन को अपना पूर्ण समर्थन दे रहे प्रख्यात सामाजिक कार्यकर्ता डॉ. के.पी. सिंह ने प्रशासनिक अधिकारियों को आड़े हाथों लिया। उन्होंने आरोप लगाया कि इतने बड़े वित्तीय फ्रॉड में पुलिस और प्रशासन द्वारा अब तक जो प्रभावी कदम उठाए जाने चाहिए थे, वे नहीं उठाए गए हैं। पीड़ितों को न्याय दिलाने के लिए आरोपियों की चल-अचल संपत्तियों, बैंक खातों और वित्तीय लेनदेन की गहन फोरेंसिक जांच होनी चाहिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि अगर 15 जून से पहले मुकदमों की प्रगति रिपोर्ट सार्वजनिक कर आरोपियों की गिरफ्तारियां नहीं हुईं, तो इस आंदोलन को उग्र और व्यापक रूप दिया जाएगा।

ज्ञापन सौंपने के दौरान ये रहे मौजूद

प्रदर्शन और शिकायत दर्ज कराने वालों में मुख्य रूप से के.पी. सिंह, प्रमोद कुमार, अनुज भारती, सूरजपाल, ज्ञानप्रकाश, सक्सेना, मिश्री लाल, वीरेंद्र पाल, पवन सक्सेना, सुरेंद्र, अमन पटेल शामिल रहे। इनके साथ ही विमला देवी, सपना सिंह, दुलारो देवी, पूनम, रामलली, अंकित पटेल, कमल कुमार, आरती, लता पटेल और पंकज त्रिपाठी सहित दर्जनों पीड़ित निवेशक कलेक्ट्रेट में मुस्तैद रहे।