भरत तिवारी प्रकरण की जांच की मांग
राष्ट्रीय अधिकार मोर्चा ने भरत तिवारी मुठभेड़ प्रकरण की निष्पक्ष न्यायिक जांच की मांग करते हुए राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन सौंपा।
भरत तिवारी मुठभेड़ प्रकरण की न्यायिक जांच की मांग उठी।
राष्ट्रीय अधिकार मोर्चा ने राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन सौंपा।
पीड़ित परिवार को आर्थिक सहायता और सरकारी नौकरी देने की मांग।
जन माध्यम
बरेली। राष्ट्रीय अधिकार मोर्चा ने बिहार में भरत तिवारी की पुलिस मुठभेड़ में हुई मृत्यु के मामले को मानवाधिकार और संवैधानिक अधिकारों से जुड़ा गंभीर विषय बताते हुए निष्पक्ष न्यायिक जांच की मांग की है। संगठन के मंडल प्रभारी सचिन कुमार शर्मा के नेतृत्व में पदाधिकारियों ने महामहिम राष्ट्रपति के नाम संबोधित ज्ञापन सिटी मजिस्ट्रेट को सौंपा।
ज्ञापन में कहा गया है कि यदि भरत तिवारी आत्मसमर्पण की स्थिति में थे अथवा निहत्थे होने के बावजूद उन पर गोली चलाई गई, तो यह संविधान प्रदत्त जीवन और स्वतंत्रता के अधिकार का गंभीर उल्लंघन माना जाएगा। संगठन ने पूरे मामले की उच्चस्तरीय, निष्पक्ष और समयबद्ध न्यायिक जांच कराने की मांग की है।
राष्ट्रीय अधिकार मोर्चा ने यह भी मांग की कि जांच पूरी होने तक घटना में शामिल पुलिस अधिकारियों और कर्मियों को निलंबित किया जाए। संगठन का कहना है कि यदि जांच में फर्जी मुठभेड़ अथवा अवैध बल प्रयोग की पुष्टि होती है, तो दोषियों के खिलाफ कठोर कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जानी चाहिए।
ज्ञापन में पीड़ित परिवार को एक करोड़ रुपये की आर्थिक सहायता, परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी और सुरक्षा प्रदान करने की मांग भी उठाई गई। इसके अतिरिक्त मामले की जांच राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग की निगरानी में कराए जाने, मुठभेड़ की वीडियो रिकॉर्डिंग, पोस्टमार्टम रिपोर्ट और फॉरेंसिक जांच रिपोर्ट सार्वजनिक करने की मांग की गई।
संगठन ने भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए पुलिस सुधार संबंधी प्रभावी कदम उठाने की भी मांग की है। ज्ञापन सौंपने के दौरान एकांश गुप्ता, रजत मिश्रा, देवांश शंखधार, अजय शर्मा, हिमांशु शंखधार, अर्चना सक्सेना, अशोक गंगवार और दामोदर दास सहित अन्य पदाधिकारी एवं कार्यकर्ता उपस्थित रहे।