भागीदारी के सम्मेलन में ही बिखर गई कांग्रेस की एकता?
मंच पर बैठने की होड़ में दिखी गुटबाजी, पांच महिला नेताओं को भी नहीं मिली जगह; राफिया शबनम के सवालों ने संगठन के भीतर मची खींचतान पर उठाए सवाल
सामाजिक भागीदारी न्याय सम्मेलन में मंच की व्यवस्था को लेकर कांग्रेस के भीतर से उठे सवाल।
राफिया शबनम का दावा; मंच पर करीब 50 नेता बैठे, लेकिन मौजूद पांच महिला नेताओं को जगह नहीं मिली।
फेसबुक पोस्ट के जरिए जताई नाराजगी; सम्मेलन की मंच व्यवस्था पर कांग्रेस नेतृत्व की प्रतिक्रिया सामने आना बाकी।
संवाददाता। बरेली
कांग्रेस में सामाजिक भागीदारी और न्याय की बात करने के लिए आयोजित सम्मेलन में ही पार्टी की अंदरूनी खींचतान और मंच पर कब्जे की होड़ चर्चा का विषय बन गई। सम्मेलन का मंच नेताओं से खचाखच भरा रहा, लेकिन महिला नेताओं के लिए जगह नहीं बन सकी। इस पूरे घटनाक्रम ने कांग्रेस के उन दावों पर सवाल खड़े कर दिए, जिनमें महिलाओं को बराबर भागीदारी देने की बात कही जाती है।
बरेली में आयोजित सामाजिक भागीदारी न्याय सम्मेलन में शहर और आसपास के क्षेत्रों से बड़ी संख्या में कांग्रेस नेता और कार्यकर्ता पहुंचे। बताया गया कि करीब 200 पुरुष नेताओं की मौजूदगी के बीच लगभग 50 नेताओं ने मंच पर स्थान बना लिया। खास बात यह रही कि मौजूद पांच महिला नेताओं को भी मंच पर जगह नहीं मिल सकी।
मंच पर जगह बनाने की यह होड़ अब कांग्रेस के अंदरूनी हालात पर सवाल खड़े कर रही है। कार्यक्रम सामाजिक न्याय और भागीदारी का था, लेकिन तस्वीर ऐसी सामने आई जिसमें मंच पर नेताओं की भीड़ थी और महिलाओं के लिए जगह तक नहीं थी। यही विरोधाभास अब कांग्रेस के भीतर चर्चा का कारण बना हुआ है।
इस व्यवस्था से नाराज कांग्रेस नेत्री राफिया शबनम ने फेसबुक पर खुलकर अपनी नाराजगी जाहिर की। उन्होंने लिखा कि सामाजिक भागीदारी और न्याय की बातें करने वाले मंच पर करीब 50 नेता बैठे, लेकिन पांच महिला नेताओं को भी जगह नहीं दी जा सकी।
उन्होंने मंच पर बैठने वाले नेताओं पर तंज कसते हुए कहा कि जनता के बीच बैठने में बेइज्जती महसूस करने वाले नेता मंच पर बैठकर भागीदारी की बात कर रहे हैं। राफिया ने महिलाओं की संख्या को लेकर भी सवाल उठाते हुए कहा कि जिस पार्टी में 50 प्रतिशत महिलाओं की भागीदारी की बात होती है, वहां 200 पुरुषों के बीच मौजूद पांच महिलाओं को भी सम्मानजनक स्थान नहीं मिल सका।
उनका सबसे तीखा संदेश था—“मंच पर बैठने से कोई नेता नहीं बन जाता, जनता के साथ बैठो तब नेता बनोगे।”
इस पूरे घटनाक्रम ने बरेली कांग्रेस की अंदरूनी गुटबाजी को भी चर्चा के केंद्र में ला दिया है। सम्मेलन का उद्देश्य सामाजिक भागीदारी और न्याय का संदेश देना था, लेकिन मंच पर जगह को लेकर दिखाई दिया उत्साह पार्टी के भीतर चल रही खींचतान की तस्वीर पेश करता नजर आया।
एक तरफ नेता मंच पर नजर आने की होड़ में रहे तो दूसरी तरफ महिला नेताओं को मंच पर स्थान तक नहीं मिल सका। ऐसे में सवाल उठना लाजिमी है कि जब अपने ही कार्यक्रम में भागीदारी बराबर नहीं हो पा रही, तो समाज में बराबरी और न्याय का संदेश कैसे पहुंचेगा?
राफिया शबनम की पोस्ट ने इसी सवाल को खुलकर सामने ला दिया है। उनकी नाराजगी को लेकर कांग्रेस कार्यकर्ताओं के बीच भी चर्चा है। हालांकि, सम्मेलन की व्यवस्था को लेकर कांग्रेस नेतृत्व की ओर से अभी कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
सामाजिक न्याय के मंच पर महिलाओं के लिए जगह न होना और मंच पर नेताओं की भीड़, बरेली कांग्रेस की इस तस्वीर ने भाषणों और जमीनी हकीकत के बीच की दूरी जरूर उजागर कर दी है।