लोकसभा में “निपुण भारत” पर सांसद नीरज मौर्य के सवाल, सरकार का जवाब अधूरा
लोकसभा में निपुण भारत मिशन पर सांसद नीरज मौर्य के सवालों पर सरकार ठोस व जिलावार जानकारी देने से बचती नजर आई।
➡️ लोकसभा में निपुण भारत पर सवाल
➡️ पिछड़े जिलों की जमीनी हकीकत उठी
➡️ सरकार का जवाब औपचारिक
हसीन दानिश । जन माध्यम
बरेली। समाजवादी पार्टी के सांसद नीरज मौर्य द्वारा लोकसभा में “निपुण भारत” मिशन की वास्तविक प्रगति को लेकर उठाए गए सवालों पर केंद्र सरकार का जवाब अधूरा और औपचारिक माना जा रहा है। सांसद ने उत्तर प्रदेश के पिछड़े और आकांक्षी जिलों—आंवला (बरेली), शाहजहांपुर, बदायूं और जौनपुर—में कक्षा तीन तक के बच्चों की मूलभूत साक्षरता और संख्यात्मक ज्ञान की स्थिति पर स्पष्ट, जिलावार जानकारी मांगी थी।
शिक्षा मंत्रालय की ओर से दिए गए लिखित उत्तर में सरकार ने “निपुण भारत” को राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के अंतर्गत सभी राज्यों में लागू बताया। जवाब में विद्या प्रवेश, जादुई पिटारा, बहुभाषी प्राइमर, शिक्षक प्रशिक्षण, डिजिटल निगरानी तंत्र और अपार आईडी जैसे कार्यक्रमों की उपलब्धियों का उल्लेख किया गया। साथ ही ‘परख’ राष्ट्रीय सर्वेक्षण 2024 के आंकड़ों का हवाला देते हुए बरेली (आंवला), बदायूं और शाहजहांपुर में कक्षा तीन के छात्रों के भाषा प्रदर्शन में सुधार का दावा किया गया।
हालांकि सांसद नीरज मौर्य के मूल प्रश्नों पर सरकार ठोस जवाब देने से बचती नजर आई। सांसद ने विशेष रूप से उन क्षेत्रों की ओर ध्यान दिलाया था, जहां सामाजिक-आर्थिक चुनौतियां अधिक हैं और जहां बच्चों की सीखने की गति अपेक्षाकृत धीमी है। उन्होंने ऐसे जिलों के लिए अतिरिक्त संसाधन, विशेष शैक्षणिक सहायता और लक्षित हस्तक्षेप की मांग की थी, लेकिन सरकार का जवाब सामान्य नीतिगत विवरणों तक ही सीमित रहा।
सांसद नीरज मौर्य ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि सरकार ने डिजिटल प्लेटफॉर्म और डेटा आधारित निगरानी का उल्लेख तो किया, लेकिन कमजोर प्रदर्शन वाले स्कूलों और जिलों में सुधार की ठोस समयबद्ध योजना स्पष्ट नहीं की। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अब तक इस मिशन से कितने बच्चों को स्कूल से जोड़ा गया, कितनों का कक्षा-1 में निर्बाध प्रवेश हुआ और क्या वास्तव में बच्चों के सीखने के स्तर में जमीन पर कोई ठोस सुधार देखने को मिला है।
यह मुद्दा शिक्षा क्षेत्र में सरकारी दावों और जमीनी हकीकत के बीच अंतर को उजागर करता है, खासकर उन पिछड़े इलाकों में जहां बुनियादी शिक्षा आज भी बड़ी चुनौती बनी हुई है। सांसद नीरज मौर्य ने मांग की कि सरकार को पारदर्शिता के साथ क्षेत्र-विशेष और जिलावार आंकड़े सार्वजनिक करने चाहिए, ताकि “निपुण भारत” मिशन की वास्तविक सफलता का निष्पक्ष आकलन हो सके।