परीक्षा नहीं, तारीखों की परीक्षा
रुहेलखंड विश्वविद्यालय ने बीए प्रथम सेमेस्टर फूड, न्यूट्रिशन व हाइजीन पेपर की परीक्षा तिथि बदलकर 17 फरवरी कर दी, छात्रों में नाराजगी।
➡️ बीए प्रथम सेमेस्टर की परीक्षा तिथि बदली
➡️ 12 फरवरी की जगह अब 17 फरवरी को पेपर
➡️ फूड, न्यूट्रिशन व हाइजीन पेपर प्रभावित
जन माध्यम
बरेली। रुहेलखंड विश्वविद्यालय रुवि की लगातार बदलती परीक्षा तिथियों ने छात्रों की मेहनत और मानसिक तैयारी पर पानी फेर दिया है। ताजा मामला बीए प्रथम सेमेस्टर की फूड, न्यूट्रिशन और हाइजीन पेपर कोड 49001 परीक्षा से जुड़ा है, जिसकी तिथि एक बार फिर बदल दी गई है। पहले यह परीक्षा 12 फरवरी को प्रस्तावित थी, लेकिन अब इसे 17 फरवरी को आयोजित किया जाएगा।
परीक्षा कार्यक्रम में बार बार हो रहे बदलावों से छात्र छात्राओं में नाराजगी साफ नजर आ रही है। उनका कहना है कि परीक्षा की तैयारी एक तय समय सारिणी के अनुसार की जाती है, लेकिन अचानक तिथियां बदलने से न सिर्फ पढ़ाई प्रभावित होती है, बल्कि यात्रा और ठहरने जैसी व्यवस्थाएं भी बिगड़ जाती हैं। इससे पहले भी बीएससी गणित, सांख्यिकी और रक्षा अध्ययन माइनर की परीक्षा को परीक्षा शुरू होने से महज एक घंटे पहले स्थगित कर दिया गया था, जिससे कई परीक्षार्थियों को बिना परीक्षा दिए लौटना पड़ा।
परीक्षा नियंत्रक संजीव कुमार के अनुसार, 12 फरवरी को बीए प्रथम सेमेस्टर की को करिकुलर मुख्य बैक परीक्षा और गुरु जंभेश्वर विश्वविद्यालय, मुरादाबाद की एमए प्रथम सेमेस्टर की परीक्षा एक ही पाली में पड़ रही थी। कॉलेजों की ओर से लगातार अनुरोध आने के बाद ही विश्वविद्यालय प्रशासन ने तिथि में संशोधन का निर्णय लिया।
इसी बीच विश्वविद्यालय ने स्नातक स्तर के बीए, बीएससी, बीकॉम, बीबीए, बीसीए, बीएससी गृहविज्ञान और बीबीए रिटेल हेल्थकेयर पाठ्यक्रमों की विषम सेमेस्टर 2025-26 की बाहरी व आंतरिक प्रयोगात्मक परीक्षाओं की नई समयसीमा भी तय कर दी है। ये परीक्षाएं 15 फरवरी तक पूरी कर ली जाएंगी। साथ ही चेतावनी दी गई है कि समय पर अंक अपलोड न करने वाले कॉलेजों का परिणाम रोका जा सकता है। नए परीक्षा शेड्यूल के अनुसार बीए प्रथम सेमेस्टर का फूड, न्यूट्रिशन और हाइजीन पेपर अब 17 फरवरी को होगा, जबकि कई अन्य पाठ्यक्रमों की परीक्षाएं फरवरी के अंत तक निर्धारित की गई हैं। हालांकि विश्वविद्यालय प्रशासन इसे समन्वय का प्रयास बता रहा है, लेकिन छात्रों का कहना है कि स्थिर और पूर्व नियोजित परीक्षा कार्यक्रम ही उनकी सबसे बड़ी जरूरत है।