शास्त्रीय संगीत पर पुस्तक का हुआ विमोचन
मेरठ में सीबीएसई राष्ट्रीय पुरस्कार से सम्मानित डॉ. शैल शर्मा की पुस्तक ‘बंदिशें तंत्र वाद्यों की बंदिशें (स्वर लिपियाँ)’ का विमोचन किया गया। पुस्तक भारतीय शास्त्रीय संगीत के विद्यार्थियों और शोधार्थियों के लिए उपयोगी मानी जा रही है।
डॉ. शैल शर्मा की स्वरचित पुस्तक का भव्य विमोचन किया गया।
पुस्तक में 24 प्रमुख रागों और तंत्र वाद्यों की बंदिशों का संकलन शामिल है।
संगीत विशेषज्ञों ने इसे विद्यार्थियों और शोधार्थियों के लिए उपयोगी ग्रंथ बताया।
जन माध्यम
मेरठ।भारतीय शास्त्रीय संगीत की समृद्ध परंपरा को संरक्षित और आगे बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल के तहत प्रख्यात संगीतविद् एवं सीबीएसई राष्ट्रीय पुरस्कार से सम्मानित डॉ. शैल शर्मा की स्वरचित पुस्तक ‘बंदिशें तंत्र वाद्यों की बंदिशें (स्वर लिपियाँ)’ का भव्य विमोचन किया गया। समारोह में संगीत जगत से जुड़े विशेषज्ञों और शिक्षाविदों ने भाग लिया।
सुभारती ग्रुप के संस्थापक डॉ. अतुल कृष्ण ने पुस्तक का विमोचन करते हुए कहा कि भारतीय शास्त्रीय संगीत देश की सांस्कृतिक विरासत का महत्वपूर्ण हिस्सा है। उन्होंने कहा कि ऐसी रचनाएं संगीत की परंपराओं को नई पीढ़ी तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।
डॉ. शैल शर्मा ने बताया कि पुस्तक में 24 प्रमुख रागों का सरल और व्यावहारिक परिचय दिया गया है। इसके साथ ही वीणा, सितार, वायलिन, सरोद और सारंगी जैसे तंत्र वाद्यों पर प्रस्तुत की जाने वाली मसीतखानी गत, रजाखानी गत तथा विभिन्न प्रकार की तानों का विस्तृत संकलन शामिल किया गया है। स्वर लिपियों के माध्यम से तैयार यह सामग्री विद्यार्थियों, शोधार्थियों और संगीत साधकों के लिए उपयोगी साबित होगी।
कार्यक्रम में रंजना करियाना, मोनिका गुप्ता, प्रो. डॉ. पिटूँ मिश्र, डॉ. भावना ग्रोवर, निशी चौहान, डॉ. श्वेता चौधरी और डॉ. दीपक सहित अनेक गणमान्य उपस्थित रहे। वक्ताओं ने पुस्तक को भारतीय शास्त्रीय संगीत शिक्षा के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण योगदान बताया।
समारोह के अंत में अतिथियों ने डॉ. शैल शर्मा के इस रचनात्मक प्रयास की सराहना करते हुए कहा कि यह कृति संगीत के संरक्षण और संवर्धन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी तथा आने वाली पीढ़ियों के लिए एक उपयोगी संदर्भ ग्रंथ सिद्ध होगी।