बरेली: देशभर में 'समान शिक्षा प्रणाली' लागू करने की मांग; मुस्लिम मजलिस ने DM को सौंपा ज्ञापन

ऑल इंडिया मुस्लिम मजलिस ने बरेली जिलाधिकारी के माध्यम से सरकार को भेजा ज्ञापन। देशभर में निजी स्कूल व्यवस्था खत्म कर समान और निःशुल्क शिक्षा प्रणाली लागू करने की उठाई मांग।

बरेली: देशभर में 'समान शिक्षा प्रणाली' लागू करने की मांग; मुस्लिम मजलिस ने DM को सौंपा ज्ञापन
बरेली: जिलाधिकारी को ज्ञापन सौंपते ऑल इंडिया मुस्लिम मजलिस पार्टी के पदाधिकारी।
HIGHLIGHTS:

ऑल इंडिया मुस्लिम मजलिस ने केंद्र व राज्य सरकार से की समान शिक्षा प्रणाली लागू करने की मांग।

निजी विद्यालय व्यवस्था को समाप्त कर शिक्षा को पूर्णतः निःशुल्क और सुलभ बनाने पर दिया जोर।

"शिक्षा हर बच्चे का अधिकार है, व्यापार नहीं" – मुख्तार अहमद, प्रदेश संगठन मंत्री।

जन माध्यम न्यूज डेस्क

बरेली (28 अप्रैल)। ऑल इंडिया मुस्लिम मजलिस पार्टी के पदाधिकारियों ने देशभर में समान शिक्षा प्रणाली लागू करने और निजी विद्यालय व्यवस्था को समाप्त करने की मांग को लेकर एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। पार्टी ने जिलाधिकारी के माध्यम से केंद्र व राज्य सरकार को ज्ञापन सौंपकर शिक्षा को पूर्णतः समान, निःशुल्क और सभी वर्गों के लिए सुलभ बनाने की पुरजोर वकालत की।

पार्टी नेताओं ने वर्तमान शिक्षा व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए कहा कि आज शिक्षा में भारी असमानता है। एक तरफ संपन्न वर्ग के बच्चे महंगे निजी विद्यालयों में आधुनिक संसाधनों के बीच पढ़ रहे हैं, वहीं दूसरी ओर गरीब, मजदूर, दलित, पिछड़े और अल्पसंख्यक वर्ग के बच्चों को संसाधनों की कमी से जूझ रहे विद्यालयों पर निर्भर रहना पड़ता है। नेताओं के अनुसार, यह भेदभाव सामाजिक न्याय और समान अवसर की भावना के विपरीत है।

सौंपे गए ज्ञापन में मुख्य रूप से चार मांगें रखी गई हैं:

  1. पूरे भारत में एक समान शिक्षा प्रणाली लागू की जाए।

  2. निजी विद्यालयों को सरकारी नियंत्रण या राष्ट्रीयकरण के दायरे में लाया जाए।

  3. कक्षा 1 से 12 तक समान पाठ्यक्रम, यूनिफॉर्म और निःशुल्क शिक्षा सुनिश्चित हो।

  4. सरकारी विद्यालयों की गुणवत्ता में सुधार कर उन्हें निजी स्कूलों के समकक्ष बनाया जाए।

जिला अध्यक्ष जमील अहमद ने स्पष्ट किया कि जब तक शिक्षा व्यवस्था एक जैसी नहीं होगी, तब तक समाज में वास्तविक बराबरी मुमकिन नहीं है। वहीं प्रदेश संगठन मंत्री मुख्तार अहमद ने दो टूक शब्दों में कहा कि शिक्षा हर बच्चे का बुनियादी अधिकार है, इसे व्यापार नहीं बनने देना चाहिए। ज्ञापन की प्रतियां मुख्यमंत्री, प्रधानमंत्री और केंद्रीय शिक्षा मंत्री को भी भेजी गई हैं।