शपथ तो ले ली, अब निभाने की बारी

बरेली में बिजली विभाग के चीफ इंजीनियर ज्ञान प्रकाश ने अधिकारियों और कर्मचारियों को 'उपभोक्ता देवो भव' की शपथ दिलाई। अब कॉल रिसीव करना और समस्याओं का समाधान अनिवार्य होगा।

शपथ तो ले ली, अब निभाने की बारी
बरेली: बिजली विभाग के दफ्तर में शपथ लेते अधिकारी और कर्मचारी। (फोटो: जन माध्यम)
HIGHLIGHTS:

बरेली के चीफ इंजीनियर ने पूरे महकमे को दिलाई 'उपभोक्ता देवो भव' की शपथ।

अब अधिकारियों को हर कॉल रिसीव करनी होगी, 'नॉट रीचेबल' का बहाना नहीं चलेगा।

शिकायतों को फाइलों में लटकाने के बजाय मौके पर समाधान करने का सख्त निर्देश।

फील्ड में काम के दौरान कर्मचारियों को सेफ्टी किट पहनना अब अनिवार्य होगा।

शपथ तो ले ली, लेकिन क्या जमीन पर बदलेगा बिजली विभाग का ढर्रा?

जन माध्यम 
बरेली।
बिजली विभाग की सुस्त कार्यशैली और उपभोक्ताओं की लगातार अनदेखी के बीच अब बदलाव की एक नई कहानी  लिखने की कोशिश शुरू हुई है। मंगलवार को चीफ इंजीनियर ज्ञान प्रकाश ने पूरे महकमे को एक ऐसी शपथ दिलाई, जो सीधे सीधे विभाग की सबसे बड़ी कमजोरी संवादहीनता पर चोट करती है।उपभोक्ता देवो भव की थीम पर आयोजित इस कार्यक्रम में अधीक्षण अभियंता, अधिशासी अभियंता, एसडीओ, जेई से लेकर संविदा कर्मियों तक ने एक स्वर में यह वादा किया कि अब न तो किसी जनप्रतिनिधि का फोन अनसुना होगा और न ही आम उपभोक्ता की शिकायत फाइलों में दबेगी। हर कॉल रिसीव करने और समस्याओं का त्वरित निस्तारण करने का संकल्प लिया गया। ज्ञान प्रकाश का यह कदम सिर्फ एक औपचारिकता नहीं, बल्कि विभाग के उस पुराने ढर्रे पर सीधा प्रहार माना जा रहा है, जहां फोन घनघनाते रहते थे और जिम्मेदारों के मोबाइल नॉट रीचेबल  बने रहते थे। उन्होंने साफ संकेत दिया कि अब लापरवाही की गुंजाइश नहीं है और उपभोक्ताओं के साथ सीधा संवाद ही भरोसा बहाल करने का एकमात्र रास्ता है। शपथ के दौरान सुरक्षा मानकों को लेकर भी गंभीरता दिखाई गई। फील्ड में काम करने वाले कर्मचारियों को सुरक्षा उपकरणों के अनिवार्य उपयोग की हिदायत दी गई, ताकि दुर्घटनाओं पर भी लगाम लगाई जा सके। यानी यह पहल सिर्फ उपभोक्ता सेवा तक सीमित नहीं, बल्कि विभागीय अनुशासन और कार्यसंस्कृति को दुरुस्त करने की एक कोशिश भी है।
हालांकि, असली परीक्षा अब शुरू होती है। क्योंकि बिजली विभाग में कहने और करने के बीच की दूरी अक्सर सवालों के घेरे में रही है। उपभोक्ता पहले भी कई घोषणाएं सुन चुके हैं, लेकिन जमीन पर तस्वीर बहुत कम बदली है। ऐसे में यह शपथ अगर व्यवहार में उतरती है, तो यह एक बड़ा बदलाव साबित हो सकती है। शहर और ग्रामीण इलाकों में बिजली कटौती, ट्रिपिंग और शिकायतों के लंबित रहने की समस्या आम है। कई बार उपभोक्ता घंटों फोन मिलाते रह जाते हैं, लेकिन जवाब नहीं मिलता। यही वजह है कि इस नई पहल को लोग उम्मीद और संदेह दोनों नजरों से देख रहे हैं।
फिलहाल, ज्ञान प्रकाश की यह पहल विभाग के लिए एक टर्निंग पॉइंट बन सकती है बशर्ते शपथ सिर्फ शब्द न रह जाए, बल्कि सिस्टम की आदत बन जाए। क्योंकि अब जनता को आश्वासन नहीं, एक्शन चाहिए।