जब सेवा ने लिया राजनीति का रूप

सैंथल नगर पंचायत के चेयरमैन कंबर एजाज़ शानू ने राजनीति को सत्ता नहीं, बल्कि सेवा का माध्यम बनाया। साधारण परिवार से निकलकर वे आज गरीबों, मरीजों और जरूरतमंदों के लिए भरोसे का नाम बन चुके हैं।

जब सेवा ने लिया राजनीति का रूप
HIGHLIGHTS:

➡️ साधारण परिवार से निकलकर जनता के नेता बने कंबर एजाज़ शानू
➡️ राजनीति को सत्ता नहीं, सेवा का माध्यम बनाया
➡️ गरीबों और जरूरतमंदों के लिए हमेशा खड़े रहे
➡️ सैंथल में दो विवाह मंडप बनवाकर गरीब परिवारों को राहत
➡️ सैकड़ों लोगों को आंखों का इलाज कराकर दी नई रोशनी
➡️ पारदर्शी और संवेदनशील प्रशासन की बनी पहचान
➡️ सैंथल की हर गली में भरोसे का नाम

जन माध्यम।

सरफराज़ खान। सैंथल।
अगर इंसान के दिल में सेवा का जज़्बा सच्चा हो, तो रास्ते खुद बनते चले जाते हैं।
जो दूसरों के दर्द को अपना समझ ले, खुदा भी उसी को बुलंदियों तक पहुंचा देता है। सैंथल कस्बे में ऐसी ही शख्सियत का नाम है कंबर एजाज़ शानू, जो आज राजनीति से ज़्यादा इंसानियत की पहचान बन चुके हैं।

एक साधारण लेकिन संस्कारों से भरे परिवार में जन्मे कंबर एजाज़ शानू ने जब होश संभाला, तो देखा कि उनके घर में समाज और राजनीति दोनों के लिए सोच और सरोकार मौजूद थे। उनके वालिद जहां एक ईमानदार एग्जीक्यूटिव ऑफिसर रहे, वहीं परिवार के अन्य सदस्य सामाजिक और राजनीतिक गतिविधियों में सक्रिय रहे। उनके चाचा मेहराब अहमद सैंथल नगर पंचायत के सभासद रह चुके हैं और उन्होंने कांग्रेस में रहते हुए पूर्व मंत्री स्वर्गीय चेतराम गंगवार के साथ काम किया। बाद में परिवार समाजवादी पार्टी से जुड़ा और आज भी उसी विचारधारा के साथ समाजसेवा में लगा हुआ है।

कंबर एजाज़ शानू ने राजनीति को सत्ता का माध्यम नहीं, बल्कि सेवा का रास्ता बनाया। चुनाव लड़ने से पहले ही वे लोगों के सुख-दुख में साथ खड़े दिखाई देने लगे थे। हर साल चिराग़ मिया के उर्स के मौके पर वे क़ौमी एकता जलसा का आयोजन करते रहे, जिसकी सदारत शहर के वरिष्ठ कार्डियोलॉजिस्ट मरहूम डॉ. सरकार हैदर करते थे, जबकि पूर्व मंत्री भगवत सरन गंगवार विशेष अतिथि के रूप में शिरकत करते थे। यह आयोजन उनकी सोच और सामाजिक समरसता का प्रतीक बन चुका था।

साल 2012 में जब सैंथल नगर पंचायत अध्यक्ष का चुनाव आया, तो कंबर एजाज़ शानू भी मैदान में उतरे। पहली ही बार में जनता ने उन पर भरोसा जताया और वे चुनाव जीत गए। तब से लेकर आज तक वे लगातार सैंथल नगर पंचायत के अध्यक्ष के रूप में सेवा दे रहे हैं।

उनके कार्यकाल में सैंथल को सिर्फ विकास नहीं मिला, बल्कि सम्मान और सहारा भी मिला। उन्होंने कस्बे में दो विवाह मंडप (शादी हॉल) बनवाकर गरीब परिवारों के लिए बड़ी राहत का इंतज़ाम किया। सैकड़ों लोगों की आंखों का इलाज कराकर उन्हें नई रोशनी दी। नगर पंचायत के कामकाज में पारदर्शिता और समयबद्धता उनकी सबसे बड़ी पहचान रही है।

एक सवाल के जवाब में चेयरमैन कंबर एजाज़ शानू कहते हैं,
“मेरे लिए यह मायने नहीं रखता कि कौन मेरे साथ है और कौन विरोध में। सैंथल की जनता मेरे लिए बराबर है। हर नागरिक का काम करना मेरा फर्ज़ है, और विरोधियों को भी सम्मान देना मेरी तहज़ीब।”

आज कंबर एजाज़ शानू का नाम सैंथल में किसी परिचय का मोहताज नहीं।
वे राजनीति के मंच पर खड़े होकर भाषण देने वाले नेता नहीं,
बल्कि बेसहारा लोगों के लिए खड़े रहने वाले दूत हैं—
और शायद यही उनकी सबसे बड़ी जीत है।