गौशाला की व्यवस्था कटघरे में

मीरगंज कान्हा गौशाला में घायल गोवंश की मौत के बाद उपचार, देखरेख और अमानवीय प्रक्रिया को लेकर प्रशासनिक व्यवस्था कटघरे में है।

गौशाला की व्यवस्था कटघरे में
HIGHLIGHTS:

➡️ सड़क हादसे में गोवंश घायल
➡️ कान्हा गौशाला में मौत
➡️ जेसीबी से लाने का आरोप
➡️ ग्रामीणों में नाराजगी
➡️ जांच की मांग तेज

जन माध्यम 
मीरगंज (बरेली)।
मीरगंज नगर पंचायत क्षेत्र स्थित कान्हा गौशाला में एक गोवंश की मौत के बाद प्रशासनिक व्यवस्थाओं को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं। यह मामला 13 जनवरी का है, जब नेशनल हाईवे के पास कुल्छा खुर्द गांव के समीप एक गोवंश सड़क दुर्घटना में घायल हो गया था। घायल अवस्था में उसे मीरगंज की कान्हा गौशाला में लाया गया। नगर पंचायत की अधिशासी अधिकारी प्रियंका के अनुसार, गोवंश का उपचार पशु चिकित्सक की देखरेख में चल रहा था। बताया गया कि बृहस्पतिवार सुबह करीब आठ बजे गोवंश की मौत हो गई। इसके बाद पशु चिकित्सक द्वारा पंचनामा तैयार किया गया औरटी नियमानुसार लोकनाथपुर घाट पर शव का अंतिम संस्कार कराया गया। प्रशासनिक स्तर पर यह दावा किया जा रहा है कि उपचार और अंतिम संस्कार की प्रक्रिया नियमों के अनुरूप की गई।
हालांकि, स्थानीय ग्रामीणों और गौ सेवकों ने पूरे प्रकरण पर आपत्ति जताई है। उनका आरोप है कि घायल गोवंश को गौशाला तक लाने और बाद में शव को ले जाने के लिए जेसीबी मशीन के बकेट का इस्तेमाल किया गया, जो न केवल अमानवीय है बल्कि शासन द्वारा निर्धारित नियमों और संवेदनशीलता के भी खिलाफ है। ग्रामीणों का कहना है कि इस तरह की प्रक्रिया गोवंश संरक्षण को लेकर केवल कागजी दावों की पोल खोलती है।
ग्रामीणों ने मांग की है कि कान्हा गौशाला की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच कराई जाए, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि उपचार में कहीं लापरवाही तो नहीं बरती गई। साथ ही जिम्मेदार अधिकारियों और कर्मचारियों के विरुद्ध कार्रवाई की भी मांग उठाई जा रही है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय रहते जांच और कार्रवाई नहीं की गई, तो यह माना जाएगा कि प्रशासन गोवंशों की मौत के प्रति गंभीर नहीं है। इस संबंध में मीरगंज नगर पंचायत की अधिशासी अधिकारी से संपर्क का प्रयास किया गया, लेकिन उनसे बात नहीं हो सकी। फिलहाल मामला क्षेत्र में चर्चा का विषय बना हुआ है और प्रशासन की अगली कार्रवाई पर सभी की निगाहें टिकी हैं।