मथुरा में किताबों का खेल, अभिभावकों पर दबाव
मथुरा में स्कूलों की मनमानी, अभिभावकों को तय दुकान से महंगी किताबें खरीदने का दबाव, कमीशनखोरी के आरोप, कार्रवाई की मांग।
तय दुकानों से किताबें खरीदने का दबाव
निजी प्रकाशनों की महंगी किताबें बेची जा रहीं
कमीशनखोरी के गंभीर आरोप
बीएसए ने कार्रवाई का दिया आश्वासन
श्याम बिहारी भार्गव । जन माध्यम
मथुरा। बच्चों की पढ़ाई के नाम पर अभिभावकों की जेब काटने का खेल अब खुलकर सामने आ रहा है। सवाल यह है क्या शिक्षा अब सेवा नहीं, सिर्फ मुनाफे का जरिया बन गई है?
जनपद में स्कूल संचालकों की मनमानी इस हद तक बढ़ चुकी है कि अभिभावकों को एक तय दुकान से ही किताबें खरीदने के लिए मजबूर किया जा रहा है। इन दुकानों पर निजी प्रकाशनों की महंगी किताबें थोप दी जाती हैं, जिससे आम परिवारों पर भारी आर्थिक बोझ पड़ रहा है।
हैरानी की बात यह है कि यह पूरा खेल बेसिक शिक्षा अधिकारी कार्यालय से महज 500 मीटर की दूरी पर ही चल रहा है, लेकिन जिम्मेदार अधिकारी अब तक खामोश हैं। जमीनी पड़ताल में सामने आया कि शहर की एक प्रमुख किताब दुकान पर नामी कॉन्वेंट स्कूलों के सेट खुलेआम बेचे जा रहे हैं।
कक्षा 2 का किताब सेट करीब 6 हजार रुपये और कक्षा 3 का सेट लगभग 7 हजार रुपये में बेचा जा रहा है। इन सेटों में क्रमशः 16 और 17 किताबें शामिल हैं, जो सभी निजी प्रकाशनों की हैं। यह न सिर्फ अभिभावकों की जेब पर भारी पड़ रहा है, बल्कि बच्चों के कंधों पर भी अनावश्यक बोझ बढ़ा रहा है।
अभिभावकों का आरोप है कि स्कूल प्रबंधन और दुकानदारों के बीच कमीशन का खेल चल रहा है। इसी वजह से उन्हें एक ही दुकान से किताबें, कॉपियां और स्टेशनरी खरीदने के लिए बाध्य किया जाता है, जबकि बाजार में सस्ते विकल्प आसानी से उपलब्ध हैं।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि एक ओर अधिकारी एनसीईआरटी की किताबें लागू कराने की बात करते हैं, वहीं दूसरी ओर उनके ही दफ्तर के आसपास नियमों की खुलेआम धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। आज तक न तो किसी दुकान की जांच हुई और न ही किसी स्कूल के खिलाफ कार्रवाई।
इस पूरे मामले में बेसिक शिक्षा अधिकारी रतन कीर्ति ने कहा है कि जल्द ही अभियान चलाकर ऐसे स्कूलों और दुकानदारों को चिन्हित किया जाएगा जो नियमों का उल्लंघन कर रहे हैं। उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
अब देखना यह है कि यह बयान भी बाकी आश्वासनों की तरह हवा में उड़ जाएगा या फिर सच में अभिभावकों को इस आर्थिक शोषण से राहत मिलेगी?