बरेली में अल हिंद अस्पताल पर शिकंजा

बरेली में अल हिंद अस्पताल पर स्वास्थ्य विभाग की सख्ती, आयुष्मान योजना के नियम तोड़ने पर नोटिस जारी, कार्रवाई की चेतावनी।

बरेली में अल हिंद अस्पताल पर शिकंजा
HIGHLIGHTS:

अल हिंद अस्पताल को कारण बताओ नोटिस

बिना पंजीकरण नए स्थान पर संचालन पकड़ा गया

पहले भी मरीज से वसूली का मामला साबित

विभाग ने दी सख्त कार्रवाई की चेतावनी

हसीन दानिश । जन माध्यम

बरेली। गरीबों के मुफ्त इलाज की सबसे बड़ी उम्मीद आयुष्मान योजना क्या निजी अस्पतालों की मनमानी की भेंट चढ़ रही है? बरेली में सामने आया मामला इसी कड़वी सच्चाई की तरफ इशारा करता है।

पिलीभीत बाईपास स्थित अल हिंद अस्पताल पर स्वास्थ्य विभाग ने आखिरकार सख्ती दिखानी शुरू कर दी है। लगातार मिल रही शिकायतों और अनियमितताओं के बाद सीएमओ डॉ. विश्राम सिंह ने औचक निरीक्षण किया, जिसमें अस्पताल को बिना नए पंजीकरण के नए स्थान पर संचालित करते हुए पकड़ा गया।

नियम साफ हैं स्थान बदलने पर नया पंजीकरण अनिवार्य है। लेकिन अस्पताल प्रबंधन ने इस नियम को पूरी तरह नजरअंदाज कर दिया। मौके पर ही अस्पताल संचालक डॉ. मोईन (डॉ. मतीन) से जवाब मांगा गया, लेकिन उनका स्पष्टीकरण सीएमओ को संतोषजनक नहीं लगा।

इसके बाद सीएमओ ने अस्पताल को कारण बताओ नोटिस जारी करते हुए सख्त कार्रवाई की चेतावनी दी है।

यह पहला मामला नहीं है जब अल हिंद अस्पताल विवादों में आया हो। जुलाई 2025 में ही एक आयुष्मान लाभार्थी से 53,416 रुपये नकद वसूलने का मामला सामने आया था। जांच में अस्पताल दोषी पाया गया था। आरोप थे कि आयुष्मान कार्ड होने के बावजूद मरीज से पैसे लिए गए, इलाज से मना किया गया और पोर्टल पर एंट्री में भी देरी की गई।

उस समय भी जुर्माना लगाया गया और मरीज को रकम लौटाने के आदेश दिए गए थे। लेकिन इसके बावजूद अस्पताल की कार्यप्रणाली में कोई सुधार नहीं आया।

अब सवाल सबसे बड़ा यही है क्या इस बार भी मामला सिर्फ नोटिस और चेतावनी तक सीमित रहेगा? या फिर विभाग वास्तव में कोई ठोस कार्रवाई करेगा?

आम मरीजों और आयुष्मान कार्डधारकों के बीच यही चर्चा है कि अगर बार-बार की गड़बड़ियों के बावजूद सख्त कदम नहीं उठाए गए, तो ऐसी योजनाओं का मकसद ही खत्म हो जाएगा।

सीएमओ डॉ. विश्राम सिंह ने सभी निजी अस्पतालों को साफ चेतावनी दी है कि आयुष्मान योजना से जुड़ी किसी भी गड़बड़ी को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। विभाग की ओर से जांच जारी है और दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई का दावा किया गया है।

आयुष्मान भारत योजना का उद्देश्य गरीब और जरूरतमंद परिवारों को सालाना 5 लाख रुपये तक का मुफ्त इलाज देना है। लेकिन जब अस्पताल ही नियमों को ताक पर रख देंगे, तो सबसे बड़ा नुकसान उन्हीं गरीब मरीजों का होगा जिनके लिए यह योजना बनाई गई थी।

अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं क्या इस बार सिर्फ कागजी कार्रवाई होगी या सच में कोई ऐसा कदम उठेगा, जो भविष्य में ऐसी मनमानी पर पूरी तरह रोक लगा सके?