नकटिया-किला नदियों को बचाने की मुहिम तेज, भाकियू ने सरकार को चेताया

भारतीय किसान यूनियन (चढ़ूनी) ने मुख्यमंत्री के नाम डीएम को ज्ञापन सौंपकर नकटिया और किला नदियों के पुनर्जीवन, अतिक्रमण हटाने और नमामि गंगे की तर्ज पर विशेष योजना लागू करने की मांग की।

नकटिया-किला नदियों को बचाने की मुहिम तेज, भाकियू ने सरकार को चेताया
HIGHLIGHTS:

• भाकियू (चढ़ूनी) ने नकटिया और किला नदियों के पुनर्जीवन के लिए मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा।

• संगठन ने अतिक्रमण, सीवर और औद्योगिक प्रदूषण से नदियों के अस्तित्व पर संकट का दावा किया।

• नमामि गंगे की तर्ज पर विशेष योजना, अतिक्रमण हटाने और उच्चस्तरीय समिति गठित करने की मांग उठाई।

जन माध्यम

 बरेली। बरेली की जीवनरेखा मानी जाने वाली नकटिया और किला नदियों के संरक्षण का मुद्दा एक बार फिर जोर-शोर से उठाया गया है। भारतीय किसान यूनियन (चढ़ूनी) ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नाम जिलाधिकारी को ज्ञापन सौंपकर दोनों नदियों के पुनर्जीवन के लिए नमामि गंगे योजना की तर्ज पर विशेष अभियान शुरू करने की मांग की। संगठन का कहना है कि यदि समय रहते प्रभावी कदम नहीं उठाए गए तो आने वाले वर्षों में जिले को गंभीर जल संकट, पर्यावरणीय असंतुलन और कृषि संकट का सामना करना पड़ सकता है।

भाकियू (चढ़ूनी) के जिलाध्यक्ष केशव सिंह सोलंकी ने आरोप लगाया कि कभी क्षेत्र की पहचान रही नकटिया और किला नदियां आज अवैध अतिक्रमण, सीवर के गंदे पानी और औद्योगिक अपशिष्ट की वजह से अपने अस्तित्व की लड़ाई लड़ रही हैं। उनका कहना है कि जिन नदियों का पानी कभी लोगों के जीवन का हिस्सा था, आज उनके किनारे दुर्गंध और प्रदूषण से क्षतिग्रस्त हैं।

उन्होंने कहा कि दोनों नदियों के किनारे हजारों हेक्टेयर उपजाऊ भूमि है और लाखों लोगों की आजीविका प्रत्यक्ष या आप्रत्यक्ष रूप से इन नदियों से जुड़ी हुई हैं। ऐसे में नदियों का सिकुड़ना केवल पर्यावरण का नहीं, बल्कि किसानों, भूजल और आने वाली पीढ़ियों के भविष्य का भी सवाल है।

ज्ञापन में सरकार से मांग की गई है कि नकटिया और किला नदियों को नमामि गंगे योजना की तर्ज पर पुनर्जीवन परियोजना में शामिल किया जाए। नदी की मूल भूमि को चिह्नित कर अवैध अतिक्रमण हटाया जाए, सीवर और गंदे नालों का पानी शोधन संयंत्रों से उपचारित करने के बाद ही नदी में छोड़ा जाए, घाटों का सौंदर्यीकरण कराया जाए तथा नदी किनारे व्यापक स्तर पर वृक्षारोपण कराया जाए। इसके साथ ही पूरे अभियान की निगरानी के लिए उच्चस्तरीय समिति गठित कर समयबद्ध कार्ययोजना लागू करने की भी मांग उठाई गई है।

मीडिया से बातचीत में केशव सिंह सोलंकी ने कहा कि नकटिया, किला और अन्य छोटी नदियों की लगातार उपेक्षा हो रही है। उन्होंने दावा किया कि कुछ वर्षों पहले तक इन नदियों का पानी स्वच्छ था, लेकिन आज वे नालों में तब्दील होती जा रही हैं। उन्होंने अवैध अतिक्रमण और कथित भू-माफियाओं की भूमिका पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि नदी बचाने की लड़ाई किसी एक वर्ग या संगठन की नहीं, बल्कि पूरे समाज की जिम्मेदारी है।

उन्होंने बताया कि भारतीय किसान यूनियन (चढ़ूनी) ने नदियों की वास्तविक स्थिति का सर्वे कराने और जल के नमूनों की जांच कराने का भी निर्णय लिया है। साथ ही सभी सामाजिक संगठनों, जनप्रतिनिधियों और आम नागरिकों से इस अभियान में सहयोग की अपील की। संगठन ने स्पष्ट किया कि यदि मांगों पर जल्द सकारात्मक कार्रवाई नहीं हुई तो किसानों के हित में लोकतांत्रिक तरीके से आंदोलन की रणनीति तैयार की जाएगी।