हत्यारोपी को बचाने का खेल बेनकाब
बदायूं पुलिस पर बड़ी कार्रवाई, दारोगा निलंबित और इंस्पेक्टर लाइन हाजिर
वर्दी की आड़ में गुनहगारों को बचाने वालों पर आखिर चल ही गया कानून का डंडा।
खाकी की साख बचाने को सख्त एक्शन, मिलीभगत पर जीरो टॉलरेंस का संदेश।
इनामी हत्यारोपी को बचाने की कथित साजिश ने पुलिस महकमे को कटघरे में ला खड़ा किया।
जन माध्यम
बदायूं। बरेली,गाजियाबाद के चर्चित हत्या कांड के इनामी आरोपित को कानून की गिरफ्त से बचाने की कथित साजिश का पर्दाफाश होते ही पुलिस महकमे में भूचाल आ गया। बदायूं के बिनावर थाने से जुड़े इस मामले में डीआईजी अजय कुमार साहनी के सख्त रुख ने यह साफ कर दिया कि वर्दी की आड़ लेकर अपराधियों को संरक्षण देने वालों के लिए पुलिस विभाग में कोई जगह नहीं है। प्रारंभिक जांच में लापरवाही और कथित मिलीभगत सामने आने के बाद दारोगा बलवीर सिंह को तत्काल निलंबित कर दिया गया, जबकि पर्यवेक्षण में चूक पाए जाने पर इंस्पेक्टर अरिहंत सिद्धार्थ को हटाकर पुलिस लाइंस भेज दिया गया। इस कार्रवाई ने पूरे विभाग को स्पष्ट संदेश दिया है कि कानून से ऊपर कोई नहीं और वर्दी का सम्मान केवल निष्पक्ष कार्यशैली से ही बचाया जा सकता है।
बताया गया कि 12 जुलाई को गाजियाबाद में हार्न बजाने को लेकर हुए विवाद में बाइक सवार विपिन कुमार की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। वारदात के बाद मुख्य आरोपित सोनू फरार होकर बदायूं पहुंच गया। आरोप है कि उसने अपने रिश्तेदार, जो पुलिस विभाग में तैनात बताए जा रहे हैं, के माध्यम से खुद को कानून की पकड़ से बचाने की कोशिश शुरू कर दी। चर्चा यह भी रही कि उसे बचाने के लिए लाखों रुपये की कथित सेटिंग का प्रस्ताव कई थानों तक पहुंचा, लेकिन अंतत बिनावर थाने में उसे अवैध तमंचा रखने के मुकदमे में गिरफ्तार दिखाकर अदालत में पेश कर जेल भेज दिया गया।
जांच में सामने आया कि आरोपित को कथित तौर पर फर्जी नाम और पते के सहारे न्यायालय में पेश किया गया, जिससे गाजियाबाद पुलिस की निगाहों से उसे बचाया जा सके। लेकिन जब गाजियाबाद पुलिस उसकी लोकेशन का पीछा करते हुए बदायूं पहुंची तो पूरा खेल सामने आ गया। इसके बाद मामला सीधे उच्चाधिकारियों तक पहुंचा और गंभीरता से जांच शुरू हुई।
एसएसपी अंकिता शर्मा के निर्देश पर एसपी सिटी अभिषेक कुमार सिंह द्वारा कराई गई प्रारंभिक जांच में दारोगा की भूमिका संदिग्ध मिली। इसके बाद बिना देर किए विभागीय कार्रवाई अमल में लाई गई। डीआईजी अजय कुमार साहनी की निगरानी में हुई इस कार्रवाई ने यह संदेश दिया कि पुलिस की साख पर दाग लगाने वाले किसी भी अधिकारी या कर्मचारी को बख्शा नहीं जाएगा। ईमानदार पुलिसकर्मियों की छवि बचाने और जनता का भरोसा कायम रखने के लिए ऐसे मामलों में त्वरित एवं कठोर कदम उठाना ही पुलिस व्यवस्था की सबसे बड़ी ताकत है।
फिलहाल पूरे प्रकरण की विस्तृत जांच जारी है। अधिकारियों का कहना है कि यदि जांच के दौरान किसी अन्य पुलिसकर्मी की भूमिका भी सामने आती है तो उसके विरुद्ध भी विभागीय और कानूनी कार्रवाई में कोई ढिलाई नहीं बरती जाएगी। इस कार्रवाई ने एक बार फिर साबित किया है कि अपराधियों के साथ साथ उन्हें संरक्षण देने वाले भी कानून के शिकंजे से नहीं बच सकते। कानून की गरिमा, वर्दी की प्रतिष्ठा और जनता के विश्वास की रक्षा के लिए उठाया गया यह कदम पुलिस महकमे में जवाबदेही और पारदर्शिता की मजबूत मिसाल बनकर उभरा है।