देवताओं का जागरण पर्व मकर संक्रांति
सेंथल क्षेत्र में मकर संक्रांति का पर्व श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया जा रहा है। उत्तरायण के शुभ संयोग में तिल-खिचड़ी, दान-पुण्य और धार्मिक आयोजनों का विशेष महत्व है।
???? Highlights
➡️ मकर संक्रांति को देवताओं के जागरण का पर्व
➡️ सूर्य के उत्तरायण होने से पुण्यकाल की शुरुआत
➡️ तिल, गुड़ और खिचड़ी का विशेष धार्मिक महत्व
➡️ 15 जनवरी को भी पर्व मनाना शुभ
➡️ 18 जनवरी को होगा खिचड़ी भोज आयोजन
सरफराज़ खान/ जन माध्यम
सेंथल (बरेली)। नगर समेत ग्रामीण अंचलों में मकर संक्रांति का पर्व आस्था, परंपरा और उल्लास के साथ मनाया जा रहा है। प्रतिवर्ष 14 जनवरी को मनाया जाने वाला यह पर्व इस बार माघ मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी के कारण 15 जनवरी को भी शुभ माना जा रहा है। इसी क्रम में नवयुवक संघ सेंथल द्वारा आयोजित खिचड़ी भोज कार्यक्रम 18 जनवरी को मौनी अमावस्या के दिन संपन्न होगा, जिसकी तैयारियां जोरों पर हैं।
खगोल और ज्योतिष शास्त्र के अनुसार आकाश मंडल को 12 राशियों में विभाजित किया गया है, जिनमें मकर दसवीं राशि है। संस्कृत में ‘मकर’ का अर्थ घड़ियाल या मगरमच्छ होता है। जब सूर्य धनु राशि से निकलकर मकर राशि में प्रवेश करता है, तो इसी खगोलीय घटना को मकर संक्रांति कहा जाता है।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार मकर संक्रांति से सूर्य उत्तरायण होते हैं। शास्त्रों में उत्तरायण को देवताओं का दिन और दक्षिणायण को देवताओं की रात कहा गया है। महाभारत में उल्लेख है कि भीष्म पितामह ने भी मोक्ष प्राप्ति के लिए उत्तरायण की प्रतीक्षा कर इसी काल में देह त्याग किया था। यही कारण है कि इस पर्व को अत्यंत पुण्यदायी माना जाता है।
पौराणिक कथा के अनुसार मकर संक्रांति पिता-पुत्र के मिलन का भी प्रतीक है। सूर्य देव इस दिन अपने पुत्र शनि देव के घर जाते हैं, क्योंकि मकर राशि शनि की स्वामित्व वाली राशि मानी जाती है। यह पर्व आपसी मतभेदों को समाप्त कर संबंधों में मधुरता लाने का संदेश देता है।
कृषि प्रधान समाज में मकर संक्रांति नई फसल के आगमन का उत्सव है। किसान सूर्य देव और प्रकृति के प्रति आभार व्यक्त करते हैं। इस दिन चावल और उड़द की दाल से बनी खिचड़ी का भोग भगवान को अर्पित किया जाता है और प्रसाद के रूप में ग्रहण किया जाता है। तिल और गुड़ का दान व सेवन भी विशेष पुण्यकारी माना जाता है। इसी परंपरा के चलते मकर संक्रांति को ‘खिचड़ी पर्व’ के नाम से भी जाना जाता है।
नगर में जगह-जगह धार्मिक आयोजनों, दान-पुण्य और सामूहिक भोज के माध्यम से मकर संक्रांति का पर्व श्रद्धा और सौहार्द के साथ मनाया जा रहा है।