‘श्रापित भूमि’ बयान से हिली हस्तिनापुर की राजनीति

जल शक्ति राज्यमंत्री दिनेश खटीक के हस्तिनापुर को “श्रापित भूमि” कहने और तीसरी बार चुनाव न लड़ने के ऐलान से सियासी हलकों में हलचल तेज हो गई है। बयान पंचायत चुनाव से पहले नए राजनीतिक संकेत दे रहा है।

‘श्रापित भूमि’ बयान से हिली हस्तिनापुर की राजनीति
HIGHLIGHTS:

➡️ सार्वजनिक मंच से हस्तिनापुर को बताया “श्रापित भूमि”
➡️ तीसरी बार चुनाव न लड़ने का ऐलान
➡️ महाभारत मंचन के दौरान दिया गया बयान
➡️ द्रौपदी के श्राप का दिया हवाला
➡️ पंचायत चुनाव से पहले बढ़ी सियासी हलचल
➡️ भाजपा की ओर से अब तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं

जन माध्यम।

हशमे आलम। मेरठ।
राजनीति में कभी-कभी एक वाक्य पूरे समीकरण बदल देता है। कुछ ऐसा ही हुआ जब उत्तर प्रदेश के जल शक्ति राज्यमंत्री और हस्तिनापुर से भाजपा विधायक दिनेश खटीक ने सार्वजनिक मंच से यह कहकर सभी को चौंका दिया कि वे अब इस सीट से तीसरी बार चुनाव नहीं लड़ेंगे। उनका यह बयान न केवल अप्रत्याशित था, बल्कि हस्तिनापुर की राजनीति में नई बहस और अटकलों को जन्म देने वाला भी साबित हुआ।

25 दिसंबर 2025 को मेरठ के खरखौदा स्थित एमएस हेरिटेज विद्यालय में आयोजित वार्षिकोत्सव कार्यक्रम के दौरान, कल्कि पीठाधीश्वर आचार्य प्रमोद कृष्णम की उपस्थिति में दिनेश खटीक ने हस्तिनापुर को “श्रापित भूमि” करार दिया। मंच पर महाभारत पर आधारित प्रस्तुति चल रही थी, उसी संदर्भ में उन्होंने द्रौपदी के श्राप का उल्लेख करते हुए कहा कि इस भूमि पर नारी सम्मान का अभाव रहा है, इसलिए यहां वास्तविक विकास संभव नहीं हो पाता।

दिनेश खटीक ने कहा कि वे दो बार हस्तिनापुर से विधायक बन चुके हैं, लेकिन तीसरी बार इस “श्रापित भूमि” से विधायक बनने की इच्छा नहीं रखते। उन्होंने यह भी दावा किया कि हस्तिनापुर से जिस दल का विधायक चुना जाता है, वही दल राज्य में सरकार बनाता है—एक ऐसा कथन जिसने राजनीतिक विश्लेषकों को सोचने पर मजबूर कर दिया है।

हस्तिनापुर, जो महाभारत कालीन ऐतिहासिक नगर माना जाता है, मेरठ जिले में स्थित है। स्थानीय मान्यताओं के अनुसार, द्रौपदी के श्राप के कारण यहां कोई भी नेता तीसरी बार विधायक नहीं बन पाता। संयोगवश, दिनेश खटीक ने 2017 और 2022 में लगातार दो बार इस सीट से जीत दर्ज की है और वर्तमान में वे योगी सरकार में जल शक्ति राज्यमंत्री हैं।

यह बयान ऐसे समय आया है जब पंचायत चुनाव नजदीक हैं। ऐसे में खटीक का यह ऐलान केवल एक व्यक्तिगत निर्णय नहीं, बल्कि बड़े राजनीतिक संकेत के रूप में देखा जा रहा है। उनका वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है और सियासी गलियारों में यह चर्चा जोरों पर है कि क्या वे किसी अन्य सीट से चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहे हैं या किसी बड़े राजनीतिक फैसले की भूमिका तैयार कर रहे हैं।

यह पहली बार नहीं है जब दिनेश खटीक अपने बयानों को लेकर चर्चा में आए हों। इससे पहले भी वे मंत्री पद को लेकर नाराजगी जता चुके हैं और इस्तीफे की धमकी दे चुके हैं। हालांकि, फिलहाल उनके इस ताजा बयान पर भाजपा की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है

हस्तिनापुर, जिसे पर्यटन स्थल के रूप में विकसित किया जा रहा है और जहां विकास योजनाओं का जिक्र खुद खटीक पहले करते रहे हैं, अब एक बार फिर राजनीति के केंद्र में आ गया है। सवाल यह है कि क्या यह बयान केवल भावनात्मक क्षण का परिणाम है, या आने वाले समय में प्रदेश की राजनीति में किसी बड़े बदलाव की भूमिका?

फिलहाल इतना तय है कि “श्रापित भूमि” वाले बयान ने हस्तिनापुर की राजनीति को नई दिशा में मोड़ दिया है—और अब सबकी निगाहें भाजपा की अगली चाल पर टिकी हैं।