बरेली: देवरनियां में युवक की मौत पर भारी बवाल, पुलिस कस्टडी में पिटाई का आरोप
बरेली के देवरनियां क्षेत्र में फुरकान की संदिग्ध मौत के बाद परिजनों ने पुलिस कस्टडी में मारपीट का आरोप लगाकर थाने का घेराव किया। एसपी उत्तरी और सीओ बहेड़ी ने भारी पुलिस बल के साथ मोर्चा संभाला।
परिजनों का दावा—युवती भगाने के केस में पूछताछ के लिए उठाए गए 45 वर्षीय फुरकान की थाने में पिटाई से बिगड़ी तबीयत, घर छोड़ते ही हुई मौत।
मौत से गुस्साए सैकड़ों ग्रामीणों ने शव को थाने के बाहर रखकर किया प्रदर्शन; पुलिस को भीड़ हटाने के लिए फटकारनी पड़ी लाठियां।
भीड़ को समझाते हुए सीओ बहेड़ी अरुण कुमार का वीडियो वायरल, जिसमें उन्होंने कहा- "जानते नहीं हो भाजपा की सरकार है, कानून-व्यवस्था बिगड़ने नहीं दी जाएगी।
इकरार / जन माध्यम
देवरनियां (बरेली)। थाना देवरनियां अंतर्गत ग्राम कठर्रा में एक अधेड़ व्यक्ति की संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत के बाद सोमवार रात से शुरू हुआ बवाल मंगलवार देर शाम तक जारी रहा। मृतक के परिजनों ने स्थानीय पुलिस पर गंभीर आरोप लगाते हुए दावा किया है कि पुलिस की बर्बर कस्टोडियल प्रताड़ना (हिरासत में मारपीट) के कारण फुरकान (45) की जान गई है। इस घटना से आक्रोशित होकर सैकड़ों ग्रामीणों ने सोमवार रात देवरनियां थाने का घेराव कर दिया, जिससे पूरे इलाके में सांप्रदायिक व कानून-व्यवस्था का भारी तनाव पैदा हो गया। हालात को काबू में करने के लिए एसपी उत्तरी समेत पांच थानों की फोर्स को मोर्चा संभालना पड़ा।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, कठर्रा गांव के एक युवक द्वारा गैर-समुदाय की एक युवती को अपने साथ भगा ले जाने का मामला सामने आया था, जिसके संबंध में देवरनियां थाने में मुकदमा दर्ज है। परिजनों का आरोप है कि इसी केस में वांछित मुख्य आरोपी के चाचा फुरकान (45) पुत्र सुबहान मियां को पुलिस सोमवार की सुबह पूछताछ के लिए घर से उठाकर थाने ले गई थी। फुरकान पहले से ही गंभीर मधुमेह (शुगर) के मरीज थे।
मृतक के बेटे जीशान और अन्य परिजनों ने बेहद संगीन आरोप लगाते हुए कहा कि थाने में तैनात पुलिसकर्मियों ने फुरकान की बेरहमी से पिटाई की, जिससे उनकी शारीरिक स्थिति अत्यधिक बिगड़ गई। आरोप है कि जब फुरकान की हालत मरने जैसी हो गई, तो पुलिस अपनी गर्दन फंसती देख उन्हें चुपके से उनके घर के बाहर छोड़ गई, जहां कुछ ही देर बाद उन्होंने दम तोड़ दिया। जैसे ही यह खबर गांव में फैली, ग्रामीण भड़क उठे और सोमवार देर शाम शव को एक वाहन में रखकर देवरनियां थाने के सामने पहुंच गए तथा मुख्य सड़क जाम कर धरना-प्रदर्शन शुरू कर दिया।
थाने पर सैकड़ों की उग्र भीड़ जमा होने और नारेबाजी से खुफिया तंत्र के हाथ-पांव फूल गए। तत्काल प्रभाव से एसपी उत्तरी मुकेश चंद्र मिश्र और क्षेत्राधिकारी (CO) बहेड़ी अरुण कुमार भारी पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे। स्थिति को बेकाबू होते देख बहेड़ी, शीशगढ़, शेरगढ़, शाही और भोजीपुरा थानों की पुलिस को आपातकालीन ड्यूटी पर बुलाकर पूरे थाने को छावनी में तब्दील कर दिया गया। रात में हंगामा बढ़ने पर पुलिस ने हल्का बल प्रयोग करते हुए लाठियां फटकारकर उग्र भीड़ को खदेड़ा और शव को बलपूर्वक कब्जे में लेकर आधी रात को ही पोस्टमार्टम के लिए जिला मुख्यालय भेजा।
हंगामे और घेराव के दौरान उत्तेजित भीड़ को शांत करने की कोशिश में जुटे सीओ बहेड़ी अरुण कुमार का एक वीडियो सोशल मीडिया और राजनीतिक गलियारों में चर्चा का केंद्र बन गया है। मौके पर मौजूद प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, सीओ ने भीड़ को सख्त लहजे में चेतावनी देते हुए कहा, "शायद आप लोग जानते नहीं हो कि यह भाजपा की सरकार है, किसी भी कीमत पर कानून-व्यवस्था को हाथ में लेने की इजाजत नहीं दी जाएगी और न ही माहौल बिगड़ने दिया जाएगा।" इस वीडियो के सामने आने के बाद स्थानीय स्तर पर लोगों में तरह-तरह की चर्चाएं शुरू हो गई हैं।
दूसरी ओर, जिला पुलिस प्रशासन ने कस्टडी डेथ और मारपीट के तमाम आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है। आधिकारिक बयान में अधिकारियों ने कहा कि उक्त व्यक्ति को कभी थाने हिरासत में लाया ही नहीं गया था। पुलिस केवल सामान्य पूछताछ के लिए गांव गई थी। मौत के सटीक और वास्तविक वैज्ञानिक कारणों का पता पोस्टमार्टम रिपोर्ट के विस्तृत विश्लेषण के बाद ही चल सकेगा, मामले की जांच की जा रही है।
पोस्टमार्टम की प्रक्रिया पूरी होने के बाद मंगलवार की देर शाम फुरकान का शव वापस उनके पैतृक गांव कठर्रा पहुंचा। गांव में दोबारा कोई अप्रिय घटना या तनाव न भड़के, इसके लिए सीओ की अगुवाई में कई थानों की पुलिस और पीएसी के जवान दोपहर से ही गांव की गलियों में मार्च कर रहे थे। देर शाम गांव के प्राइमरी स्कूल के समीप स्थित कब्रिस्तान में भारी पुलिस बल और सन्नाटे के बीच फुरकान के शव को सुपुर्दे-खाक कर दिया गया।
इधर, मृतक के बेटे जीशान ने रोते हुए मीडिया से कहा, "मेरे बेकसूर पिता को पुलिस की प्रताड़ना ने मार डाला है। हमें स्थानीय पुलिस से न्याय की कोई उम्मीद नहीं है। अगर यहां इंसाफ नहीं मिला, तो हम इस लड़ाई को लेकर उच्च न्यायालय और शासन स्तर तक जाएंगे।"