नवजात बच्ची बेचने का आरोप, अस्पताल पर सवाल
बरेली के आंवला में महिला ने अस्पताल पर नवजात बच्ची को बेचने का आरोप लगाया। स्टाफ की मिलीभगत की आशंका, जिलाधिकारी से जांच की मांग।
महिला ने नवजात बच्ची को बेचने का गंभीर आरोप लगाया
अस्पताल ने बच्ची की मौत बताई, लेकिन न शव दिखाया न सौंपा
स्टाफ पर मिलीभगत और अवैध वसूली के आरोप
जिलाधिकारी से निष्पक्ष जांच और सख्त कार्रवाई की मांग
जन माध्यम
बरेली। “मां ने बच्ची को जन्म दिया लेकिन गोद में लेने से पहले ही उसे ‘मृत’ बता दिया गया। सवाल है क्या सचमुच वह बच्ची मर गई, या कहीं और बेच दी गई?”
प्रसव के बाद बच्ची ‘गायब’, मौत की सूचना
जिले के आंवला तहसील क्षेत्र से एक बेहद सनसनीखेज मामला सामने आया है। ग्राम डिंडौरी निवासी कमलेश ने आरोप लगाया है कि सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र बल्लियां में प्रसव के बाद उनकी नवजात बच्ची को संदिग्ध परिस्थितियों में गायब कर दिया गया। अस्पताल कर्मियों ने उन्हें होश में आने पर बताया कि बच्ची की मौत हो गई है। लेकिन मां का दिल इस बात को मानने को तैयार नहीं और यहीं से शुरू होता है सवालों का सिलसिला।
न शव दिखाया, न दिया कोई सबूत
पीड़िता का आरोप है कि जब उन्होंने अपनी बच्ची को देखने और उसका शव सौंपने की मांग की, तो अस्पताल स्टाफ ने कोई स्पष्ट जवाब नहीं दिया। न तो बच्ची को दिखाया गया और न ही कोई प्रमाण दिया गया। क्या किसी मां को उसकी संतान का अंतिम दर्शन करने का अधिकार भी नहीं? यह लापरवाही नहीं, बल्कि शक को और गहरा करने वाली गंभीर स्थिति है।
अस्पताल कर्मियों पर मिलीभगत का आरोप
कमलेश ने एएनएम/डिलीवरी इंचार्ज शिखा सक्सेना, उनके पति अतुल सक्सेना (आयुष्मान मित्र) और आशा कार्यकर्ता नीरज प्रजापति पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि इन लोगों ने मिलकर नवजात बच्ची को अवैध रूप से बेच दिया। साथ ही अस्पताल में अवैध वसूली और अनियमितताओं के भी आरोप लगाए गए हैं। अगर यह सच है, तो यह सिर्फ लापरवाही नहीं बल्कि मानवता के खिलाफ अपराध है।
शिकायत के बाद भी कार्रवाई नहीं, प्रशासन पर सवाल
पीड़िता ने बताया कि वह पहले भी कई बार अधिकारियों से शिकायत कर चुकी हैं, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। अब उन्होंने जिलाधिकारी को प्रार्थना पत्र देकर निष्पक्ष जांच और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है। सवाल सीधा है क्या एक मां को अपनी ही बच्ची के सच के लिए यूं दर-दर भटकना पड़ेगा? और अगर अब भी जांच नहीं हुई, तो क्या यह मामला भी दबा दिया जाएगा?