गौवध निवारण अधिनियम उल्लंघन मामले में दो आरोपियों को तीन-तीन साल की कैद
बरेली मीरगंज में 2017 का पुराना गौवध मामला: इसरार और शाहिद को 3-3 साल कठोर कारावास। 250 किलो गोमांस बरामद, प्रोबेशन से अदालत का इनकार।
➡️ 2017 का पुराना मामला: मीरगंज में 250 किलो गोमांस बरामद
➡️ आरोपी इसरार और शाहिद को 3-3 साल कठोर कारावास
➡️ 1000-1000 रुपये जुर्माना, न देने पर 10-10 दिन अतिरिक्त जेल
➡️ बचाव पक्ष की प्रोबेशन याचिका खारिज
➡️ अदालत: अपराध की गंभीरता को देखते हुए कोई रियायत नहीं
➡️ मुख्य आरोपी शाहिद टॉप-10 अपराधियों में शुमार
➡️ अभियोजन की प्रभावी पैरवी से मिली बड़ी सफलता
हसीन दानिश/ जन माध्यम
बरेली। मीरगंज थाना क्षेत्र में वर्ष 2017 में 250 किलो गौमांस बरामदगी के एक पुराने मामले में अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश/ विशेष न्यायाधीश (गौवध निवारण) की अदालत ने शुक्रवार को दो आरोपियों को कठोर कारावास की सजा सुनाई। अदालत ने आरोपी इसरार पुत्र मुस्तकीम और शाहिद पुत्र मुबारक, दोनों निवासी ग्राम भमौरा, थाना मीरगंज को उत्तर प्रदेश गौवध निवारण अधिनियम की धारा 3/8 के तहत तीन-तीन वर्ष के कठोर कारावास और एक-एक हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई। जुर्माना जमा न करने पर दोनों को दस-दस दिन का अतिरिक्त साधारण कारावास भुगतना होगा।मामला क्राइम नंबर 445/2017 का है, जिसमें पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से बड़ी मात्रा में गौमांस बरामद किया था। शुक्रवार को पत्रावली पेश होने पर दोनों पक्षों की बहस पूरी हुई। सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता (अपराध) नीलिश सिंह ने अदालत से अधिकतम सजा की मांग करते हुए कहा कि अपराध की गंभीरता और बरामद गौमांस की भारी मात्रा को देखते हुए आरोपियों को किसी तरह की रियायत नहीं दी जानी चाहिए।बचाव पक्ष के अधिवक्ता ने दया याचिका दाखिल कर आरोपियों को न्यूनतम सजा या प्रोबेशन का लाभ देने का अनुरोध किया। उन्होंने तर्क दिया कि दोनों आरोपी अपने-अपने परिवार के इकलौते कमाऊ सदस्य हैं और घर में छोटे-छोटे बच्चे हैं।
दोनों पक्षों को सुनने के बाद अदालत ने कहा कि अपराध की प्रकृति और बरामद माल की भारी मात्रा को देखते हुए प्रोबेशन का लाभ देना उचित नहीं है। हालांकि आरोपियों की पारिवारिक स्थिति को ध्यान में रखते हुए निर्धारित सजा से अधिक दंड नहीं दिया जा रहा है।
ज्ञात हो कि मुख्य आरोपी शाहिद मीरगंज पुलिस के रिकॉर्ड में टॉप-10 अपराधियों में शुमार है। सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता नीलिश सिंह की प्रभावी पैरवी से अभियोजन पक्ष को सफलता मिली।