अतिक्रमण अभियान में बवाल

शेरगढ़ के मुख्य बाजार में अतिक्रमण हटाओ अभियान के दौरान ईओ और व्यापारी के बीच विवाद बढ़कर मारपीट तक पहुंच गया। दोनों पक्षों ने थाने में तहरीर देकर कार्रवाई की मांग की है।

अतिक्रमण अभियान में बवाल
HIGHLIGHTS:

➡️ शेरगढ़ मुख्य बाजार में चला अतिक्रमण अभियान
➡️ ईओ और व्यापारी के बीच तीखी बहस
➡️ विवाद बढ़कर मारपीट तक पहुंचा

हसीन दानिश । जन माध्यम
शेरगढ़ (बरेली)।
नगर पंचायत द्वारा चलाए जा रहे अतिक्रमण हटाओ अभियान के दौरान बुधवार को मुख्य बाजार में जमकर हंगामा हो गया। कार्रवाई के बीच अधिशासी अधिकारी (ईओ) दुर्गेश कुमार सिंह और एक व्यापारी के बीच कहासुनी इतनी बढ़ी कि मामला मारपीट तक पहुंच गया। घटना के बाद दोनों पक्षों ने शेरगढ़ थाने में एक-दूसरे के खिलाफ तहरीर देकर कार्रवाई की मांग की है।

जानकारी के अनुसार, नगर पंचायत की टीम दोपहर करीब तीन बजे मुख्य सड़क पर अवैध कब्जे हटाने पहुंची थी। इसी दौरान दुकानदार शेखर गुप्ता ने कार्रवाई का विरोध जताया। उनका आरोप था कि नगर पंचायत चयनित रूप से कार्रवाई कर रही है और उन्हें निशाना बनाया जा रहा है। इस बात को लेकर ईओ और व्यापारी के बीच तीखी बहस शुरू हो गई।

प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, बहस कुछ ही देर में गाली-गलौज में बदल गई। आरोप है कि विवाद बढ़ने पर व्यापारियों की ओर से ईओ के साथ धक्का-मुक्की और मारपीट की गई। वहीं व्यापारी पक्ष का कहना है कि कार्रवाई के दौरान अधिकारियों द्वारा अभद्र व्यवहार किया गया, जिसके बाद स्थिति बिगड़ी।

मौके पर मौजूद पुलिसकर्मियों ने हस्तक्षेप कर स्थिति को नियंत्रित किया और दोनों पक्षों को थाने भेजा। ईओ दुर्गेश कुमार सिंह ने दुकानदार और उसके साथियों पर सरकारी कार्य में बाधा डालने और मारपीट का आरोप लगाया है। वहीं व्यापारी पक्ष ने अधिकारियों पर दुर्व्यवहार और जबरन कार्रवाई का आरोप लगाते हुए तहरीर दी है।

घटना के बाद मुख्य बाजार में अफरा-तफरी का माहौल रहा और दुकानदारों में रोष देखा गया। नगर पंचायत प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि अतिक्रमण हटाने का अभियान नियमानुसार जारी रहेगा। दूसरी ओर व्यापारियों का कहना है कि यदि पक्षपातपूर्ण कार्रवाई हुई तो वे विरोध दर्ज कराते रहेंगे।

पुलिस ने दोनों पक्षों की तहरीर के आधार पर जांच शुरू कर दी है। शेरगढ़ थाना क्षेत्र की यह घटना अतिक्रमण विरोधी कार्रवाई के दौरान बढ़ते तनाव की ओर इशारा करती है। अब जांच के बाद ही स्पष्ट होगा कि विवाद की असली वजह क्या थी और दोष किसका है।