तहसील में गंदगी का राज

बरेली तहसील परिसर में पुरुष शौचालय बदहाल स्थिति में मिला, जबकि महिला शौचालय का अभाव बताया जा रहा है। कैंटीन के पास गंदगी से संक्रमण फैलने का खतरा बढ़ा, प्रशासन की चुप्पी पर सवाल।

तहसील में गंदगी का राज
HIGHLIGHTS:

➡️ तहसील परिसर में पुरुष शौचालय बदहाल
➡️ महिला शौचालय का अभाव
➡️ कैंटीन के पास फैली गंदगी

हसीन दानिश । जन माध्यम
बरेली।
इंसाफ की उम्मीद लेकर तहसील पहुंचने वाली जनता को यहां बुनियादी सुविधाओं के नाम पर बदहाली का सामना करना पड़ रहा है। तहसील परिसर का पुरुष शौचालय गंदगी से पटा पड़ा है। अंदर प्रवेश करते ही तेज बदबू से सांस लेना मुश्किल हो जाता है। फर्श पर कीचड़ और गंदगी जमी है, दीवारें दागदार हैं और नियमित सफाई के कोई संकेत नजर नहीं आते।

स्थिति की गंभीरता यहीं खत्म नहीं होती। परिसर में महिला शौचालय का अभाव बताया जा रहा है। महिला फरियादियों, अधिवक्ताओं और अन्य आगंतुकों को भारी असुविधा का सामना करना पड़ता है। उन्हें या तो परिसर से बाहर वैकल्पिक व्यवस्था खोजनी पड़ती है या असुरक्षित परिस्थितियों में समझौता करना पड़ता है। यह हालात महिलाओं की गरिमा और सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े करते हैं।

सबसे चिंताजनक पहलू यह है कि यह बदहाल शौचालय परिसर की कैंटीन के ठीक बगल में स्थित है। जहां प्रतिदिन बड़ी संख्या में फरियादी, मजदूर, छात्र और आम नागरिक चाय-नाश्ता व भोजन करते हैं। स्वच्छता के अभाव में संक्रामक बीमारियों के फैलने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता। स्थानीय लोगों का कहना है कि इस स्थिति से टाइफाइड, हैजा और पेट संबंधी रोगों का खतरा बना रहता है।

मामले को लेकर जब उपजिलाधिकारी प्रमोद कुमार से प्रतिक्रिया लेने का प्रयास किया गया, तो उन्होंने इस पर टिप्पणी करने से इनकार कर दिया। प्रशासनिक चुप्पी ने लोगों की नाराजगी को और बढ़ा दिया है।

तहसील जैसे महत्वपूर्ण सरकारी परिसर में बुनियादी स्वच्छता और महिला शौचालय की अनुपलब्धता व्यवस्था की कार्यशैली पर प्रश्नचिह्न लगाती है। स्वच्छता अभियानों और सुविधाओं के दावों के बीच तहसील की यह तस्वीर जमीनी हकीकत को उजागर करती है। अब देखना होगा कि संबंधित विभाग इस ओर कब तक ठोस कदम उठाता है और जनता को राहत मिलती है।