लापरवाही या मौत का निमंत्रण?, हेडफोन की लत ने ली चार बच्चों के पिता की जान, जाने मामला

लापरवाही या मौत का निमंत्रण?, हेडफोन की लत ने ली चार बच्चों के पिता की जान, जाने मामला
demo image

बरेली। आधुनिक तकनीक और डिजिटल गैजेट्स की दुनिया ने इंसान की जिंदगी को जितना आसान बनाया है। उतना ही यह कई बार उसकी मौत का कारण भी बन जाता है। ऐसा ही एक दर्दनाक हादसा के स्वालेनगर रेलवे क्रासिंग पर हुआ। जहां हेडफोन लगाए ट्रैक पार कर रहे संजय उर्फ तन्ने को ट्रेन ने कुचल दिया। इस लापरवाही ने न सिर्फ उनकी जिंदगी छीन ली। बल्कि उनके परिवार को भी गहरे सदमे में डाल दिया। दो दिन पहले स्वालेनगर रेलवे क्रासिंग पर एक अज्ञात शव मिला था। स्थानीय पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम हाउस भेज दिया था। मृतक के पास कोई पहचान पत्र नहीं मिला। जिससे उसकी पहचान नहीं हो पाई। इस दौरान कुंवरपुर के रहने वाले संजय उर्फ तन्ने के परिवार ने उनकी गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई थी। दो दिन तक परिवार उन्हें तलाशता रहा। लेकिन कोई खबर नहीं मिली। आखिरकार जब परिजन पोस्टमार्टम हाउस पहुंचे और शव देखा। तो उनकी दुनिया ही उजड़ गई। शव संजय का ही था। शव देखते ही उसकी पत्नी रामवती और परिजन दहाड़ें मारकर रोने लगे। चार मासूम बच्चे भी बिलख-बिलख कर अपने पिता को पुकार रहे थे। लेकिन अब उनकी सुनने वाला कोई नहीं था।

परिजनों ने बताया कि संजय दो दिन पहले किसी काम से बाहर गए थे। उन्हें आदत थी कि घर से निकलते ही हेडफोन कान में लगा लेते थे। इसी आदत के चलते उन्होंने रेलवे ट्रैक पार करते समय भी हेडफोन लगा रखा था। वह शायद मोबाइल पर गाने सुन रहे थे या किसी कॉल पर व्यस्त थे। लेकिन इसी लापरवाही ने उनकी जिंदगी छीन ली। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक ट्रेन करीब आ रही थी। लोग आवाज भी दे रहे थे। लेकिन संजय ने कुछ नहीं सुना। जब तक किसी को कुछ समझ आता। ट्रेन उन्हें कुचल चुकी थी। मौके पर ही उनकी मौत हो गई।

संजय की मौत के बाद परिवार के सामने बड़ा संकट खड़ा हो गया है। वह परिवार के एकमात्र कमाने वाले थे। उनकी पत्नी रामवती पर अब चार बच्चों की जिम्मेदारी अकेले आ गई है। परिवार के लोग बार-बार यही कह रहे थे कि अगर संजय हेडफोन नहीं लगाए होते तो शायद आज वह हमारे साथ होते।
गांव में मातम पसरा हुआ है।