सनकी पति का खौफनाक हमला, दो की मौत
बरेली के इज्जतनगर क्षेत्र में पंचायत के दौरान सनकी पति ने चाकू से हमला कर पत्नी के भाई और मां की हत्या कर दी, जबकि पत्नी गंभीर रूप से घायल हो गई। आरोपी फरार है।
पंचायत के दौरान सनकी पति ने चाकू से किया ताबड़तोड़ हमला
पत्नी के भाई और मां की मौत, पत्नी गंभीर घायल
आरोपी पहले भी हत्या के मामले में जा चुका है जेल
वारदात के बाद आरोपी फरार, पुलिस तलाश में जुटी
जन माध्यम
बरेली। इज्जतनगर थाना क्षेत्र के रहपुरा चौधरी गांव में सोमवार को हुई खौफनाक वारदात ने इंसानियत को झकझोर कर रख दिया। पंचायत के नाम पर जुटे लोगों के सामने एक गुस्सैल और आपराधिक प्रवृत्ति के पति ने चाकू से ताबड़तोड़ हमला कर दो लोगों की निर्मम हत्या कर दी, जबकि अपनी ही पत्नी को मौत के मुहाने पर पहुंचा दिया।
कुछ ही मिनटों में हंसी मजाक और समझौते की उम्मीद से शुरू हुई पंचायत चीख पुकार और खून से सनी जमीन में बदल गई। इस घटना ने न सिर्फ गांव बल्कि पूरे इलाके को दहशत और गुस्से से भर दिया है। शादी से ही तनाव का रिश्ता
गांव के रहने वाले अफसर खान पुत्र सरवर की शादी वर्ष 2017 में सायमा पुत्री नन्हे के साथ हुई थी। लेकिन यह रिश्ता शुरुआत से ही तनाव और झगड़ों में घिरा रहा।
परिजनों के अनुसार अफसर खान बेहद गुस्सैल स्वभाव का है। मामूली बातों पर भी उसका पारा चढ़ जाता था और वह मारपीट तक पर उतर आता था। इसी वजह से सायमा कई बार मायके आकर रहने लगी और उसने ससुराल लौटने से साफ इनकार कर दिया। इससे पहले अफसर खान का अतीत भी खून से सना हुआ है। वर्ष 2022 में उसने अपने ही सगे मामा की हत्या कर दी थी। यह मामला थाना बिथरी चैनपुर क्षेत्र में दर्ज हुआ था और पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था। कुछ साल बाद अदालत से जमानत मिलने पर वह फिर गांव लौट आया। लेकिन जेल से बाहर आने के बाद उसके व्यवहार में कोई सुधार नहीं आया। उल्टा वह और ज्यादा आक्रामक हो गया और पत्नी को जबरन घर ले जाने की जिद पकड़ ली। सायमा ने अपने पति की धमकियों से तंग आकर 15 मार्च रविवार को थाना इज्जतनगर में लिखित तहरीर दी थी। उसने साफ कहा था कि अफसर खान उसे और उसके परिवार को जान से मारने की धमकी दे रहा है। सायमा ने पुलिस को बताया था कि आरोपी खुलेआम कहता है कि वह पहले भी हत्या कर चुका है और जरूरत पड़ी तो पूरे परिवार को खत्म कर देगा। लेकिन यह चेतावनी पुलिस के फाइलों में दबकर रह गई। कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई और न ही पीड़ित परिवार की सुरक्षा के लिए कोई कदम उठाया गया। लगातार बढ़ते विवाद को खत्म करने के लिए सोमवार को गांव में पंचायत बुलाई गई। पंचायत गांव के ही रशीद के घर पर बैठी थी। सभी को उम्मीद थी कि बातचीत से कोई रास्ता निकल जाएगा और मामला शांत हो जाएगा। बहुत मौजूद लोगों का कहना है कि अफसर खान पंचायत में पहुंचते ही उग्र हो गया। गाली गलौज करते हुए उसने जोर से कहा मेरी पंचायत कौन करेगा, मैं खुद बदमाश हूं।
इतना कहते ही उसने अपनी जेब से कटीला चाकू निकाल लिया। वहां मौजूद लोग कुछ समझ पाते, उससे पहले ही उसने सायमा के 19 वर्षीय भाई आदिल पर ताबड़तोड़ वार कर दिए। हमले की तेजी इतनी ज्यादा थी कि आदिल मौके पर ही लहूलुहान होकर गिर पड़ा।
इसके बाद आरोपी का गुस्सा और बढ़ गया। उसने सायमा की मां आसमा पर भी चाकू से हमला कर दिया। घटना से घबराए लोग जब तक आरोपी को पकड़ने की कोशिश करते, वह वहां से भागने लगा। लेकिन जाते जाते उसने अपनी पत्नी सायमा को भी नहीं छोड़ा। उसने उसके पेट में चाकू से वार किया और मौके से फरार हो गया। कुछ ही पलों में पूरा घर मातम में बदल गया। घायल आदिल, उसकी मां आसमा और सायमा को तुरंत अस्पताल ले जाया गया। लेकिन अस्पताल पहुंचते पहुंचते 19 वर्षीय आदिल की सांसें थम चुकी थीं। कुछ देर बाद 45 वर्षीय आसमा ने भी दम तोड़ दिया।
सायमा की हालत बेहद नाजुक बनी हुई है। डॉक्टरों ने उसे आईसीयू में भर्ती किया है और उसकी जिंदगी बचाने के लिए लगातार कोशिश की जा रही है। इस घटना के बाद पूरे रहपुरा चौधरी गांव में सन्नाटा पसरा हुआ है। लोग अब भी यकीन नहीं कर पा रहे कि पंचायत के बीच इतनी बेरहमी से दो लोगों की हत्या हो गई। ग्रामीणों में पुलिस के प्रति गहरा आक्रोश भी है। उनका कहना है कि अगर पुलिस पहले ही आरोपी के खिलाफ सख्त कदम उठा लेती तो यह खून खराबा शायद टल सकता था। सबसे बड़ा सवाल यही है कि जब पीड़िता ने पहले ही लिखित शिकायत देकर अपनी जान को खतरा बताया था, तो पुलिस ने उसे गंभीरता से क्यों नहीं लिया? क्या पुलिस की यह लापरवाही दो मासूम जिंदगियों की मौत की जिम्मेदार नहीं है?
फरार आरोपी की तलाश जारी
वारदात के बाद आरोपी अफसर खान फरार हो गया है। पुलिस उसकी तलाश में कई जगह दबिश दे रही है। अधिकारियों का कहना है कि जल्द ही उसे गिरफ्तार कर लिया जाएगा। लेकिन गांव के लोगों के दिल में एक ही सवाल गूंज रहा है , क्या अगर समय रहते कार्रवाई होती, तो आज यह पंचायत खून से लाल नहीं होती?