इलाहाबाद हाईकोर्ट के सख़्त तेवर
बरेली 26 सितंबर हिंसा मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अदनान की FIR रद्द करने की याचिका खारिज की। अदालत: गंभीर अपराध के संकेत, पुलिस पर तेजाब-पत्थर हमला, जांच जारी रहेगी।
➡️ इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बरेली 26 सितंबर हिंसा की FIR रद्द करने की याचिका खारिज की
➡️ अदनान की दलीलें खारिज, अदालत: प्रथम दृष्टया गंभीर अपराध के संकेत
➡️ पुलिस पर ईंट-पत्थर, तेजाब, गोलीबारी का हमला, कई जवान घायल
➡️ मौलाना तौकीर रजा पर 10 मुकदमे, 7 में सीधे नामजद
➡️ धारा 163 के बावजूद नारेबाजी और उपद्रव, भीड़ बेकाबू
➡️ हाईकोर्ट: जांच रोकना कानून-व्यवस्था के लिए घातक
➡️ अदालत का संदेश: कानून से ऊपर कोई नहीं
हिंसा में एफआईआर बरकरार अदालत बोली,अपराध के संकेत साफ़, जांच ज़रूरी
जन माध्यम
बरेली। 26 सितंबर को शहर में भड़की हिंसा से जुड़ी एफआईआर को रद्द कराने की मांग पर इलाहाबाद हाई कोर्ट ने बेहद सख़्त रुख अपनाया है। अदालत ने याची अदनान की दलीलों को खारिज करते हुए साफ कहा कि प्रथम दृष्टया उसके खिलाफ गंभीर अपराध का संकेत मिलता है। ऐसे में एफआईआर रद्द करना न सिर्फ जांच प्रक्रिया को प्रभावित करेगा, बल्कि कानून-व्यवस्था के लिए भी घातक सिद्ध होगा। अदालत ने याचिका को निस्तारित करते हुए कहा कि याची चाहे तो अन्य कानूनी विकल्पों का सहारा ले सकता है।अतिरिक्त महाधिवक्ता अनूप त्रिवेदी और सहायक महाधिवक्ता पारितोष मालवीय ने अदालत को बताया कि घटना के दौरान भीड़ ने पुलिस पर जानलेवा हमला किया था। ईंट-पत्थर, तेजाब से भरी बोतलें और यहां तक कि गोलियां भी चलाई गईं। पुलिसकर्मी, जो शहर की सुरक्षा में तैनात थे, उस दिन खुद अपनी सुरक्षा को लेकर जूझ रहे थे। कई जवान गंभीर रूप से घायल हुए और हालात काबू से बाहर होते देख पुलिस को आत्मरक्षा में फायरिंग करनी पड़ी।राज्य सरकार ने बताया कि मौलाना तौकीर रज़ा द्वारा समुदाय विशेष को संबोधित करने के आह्वान के बाद उपद्रव की शुरुआत हुई। बीएनएस की धारा 163 के तहत लागू निषेधाज्ञा के बावजूद 200–250 लोग इकट्ठा हुए, और मौलाना आज़ाद इंटर कॉलेज से श्यामगंज चौराहे तक नारेबाज़ी करते हुए आगे बढ़े। पुलिस की चेतावनी के बाद भीड़ और उग्र हो गई और झड़प शुरू हो गई।अभियोजन के अनुसार, पथराव और तेजाब फेंके जाने से दो अधिकारी घायल हुए, कई पुलिसकर्मियों के कपड़े फट गए। भीड़ की आक्रामकता लगातार बढ़ती गई और पुलिस को पीछे हटना पड़ा।राज्य सरकार ने अदालत को बताया कि मौलाना तौकीर रज़ा पर उपद्रव से जुड़े दस मुकदमे दर्ज हुए। इनमें सात मुकदमों में उन्हें सीधे नामजद किया गया, जबकि तीन मामलों में विवेचना के दौरान उनकी भूमिका सामने आई।
राज्य ने सुप्रीम कोर्ट के कई महत्वपूर्ण फैसलों का हवाला देते हुए दलील दी कि जांच के इस प्रारंभिक चरण में राहत देना न्याय के सिद्धांतों के विरुद्ध होगा। हाई कोर्ट ने एफआईआर निरस्त करने का अनुरोध खारिज करते हुए कहा ऐसे गंभीर मामले में कानून अपनी राह पर चलेगा।