बीएलओ सर्वेश की मौत से हड़कंप

परधौली बीएलओ सर्वेश गंगवार की SIR ड्यूटी में हार्ट अटैक से मौत, परिवार बोला – दिन-रात काम और अफसरों की डांट ने ली जान, 1 करोड़ मुआवजे की मांग।

बीएलओ सर्वेश की मौत से हड़कंप
HIGHLIGHTS:

➡️ परधौली बीएलओ सर्वेश गंगवार की SIR ड्यूटी में हार्ट अटैक से मौत
➡️ परिवार: दिन-रात काम, रात 12 बजे तक डांट-फटकार ने ले ली जान
➡️ 2 महीने पहले पत्नी कैंसर से गईं, अब 5 साल के जुड़वां अनाथ
➡️ सपा ने 1 करोड़ मुआवजा और नौकरी की मांग की
➡️ शिक्षक संगठन: रैंकिंग के चक्कर में अमानवीय दबाव
➡️ सिस्टम की खामियां और अफसरों की कड़ाई पर सवाल

ड्यूटी का दबाव, सिस्टम की खामियां और अफसरों की कड़ाई एसआईआर अभियान पर उठे गंभीर सवाल

जन माध्यम 
बरेली।
जिले में चल रहे एसआईआर अभियान ने बुधवार को एक ऐसी त्रासदी देखी, जिसने हर किसी को भीतर तक झकझोर दिया। परधौली प्राथमिक विद्यालय में तैनात बीएलओ और सहायक अध्यापक सर्वेश कुमार गंगवार की ड्यूटी के दौरान अचानक हार्ट अटैक से मौत हो गई। मगर यह सिर्फ एक मौत नहीं, बल्कि उस दबाव, अपमान और बेहिसाब थकान का दर्दनाक परिणाम है, जिसकी ओर लंबे समय से शिक्षक इशारा करते आ रहे थे।
सर्वेश के बड़े भाई योगेश गंगवार, जो स्वयं एसआईआर में सुपरवाइजर हैं, फूट पड़े दिनभर इंटरनेट नहीं चलता, एप बार बार फेल होता है 5 बजे ड्यूटी खत्म, फिर 5:30 बजे बैठक, उसके बाद रात 11–12 बजे तक काम। अफसर देर रात तक फोन कर डांटते थे। सर्वेश तनाव में था, यह हादसा नहीं दबाव की वजह से हुई मौत है। भाई के शब्दों में दर्द भी था और सिस्टम के प्रति गहरा आक्रोश भी।
राजनीतिक दल भी इस मौत को सिस्टम की विफलता मान रहे हैं। मृतक के घर पहुंचे सपा जिलाध्यक्ष शिवचरन कश्यप व महानगर अध्यक्ष शमीम खां सुल्तानी ने कहा कि असंभव लक्ष्य, अमानवीय दबाव और अफसरों की कड़ाई ने शिक्षक की जान ली। उन्होंने सरकार से एक करोड़ रुपये मुआवजा और आश्रित को सरकारी नौकरी देने की मांग की। साथ ही एसआईआर अवधि को छह माह करने की भी बात कही।शिक्षक संगठन खुलकर सामने आए। प्राथमिक शिक्षक संघ के जिलाध्यक्ष नरेश गंगवार ने कहा शिक्षक रोज आधी रात तक काम कर रहे हैं, ऊपर से बेवजह की डांट-फटकार। जूनियर हाईस्कूल शिक्षक संघ के मंडल अध्यक्ष डॉ. विनोद शर्मा और राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ के जिला कोषाध्यक्ष परीक्षित गंगवार ने भी अधिकारी रैंकिंग के चक्कर में अमानवीय दबाव बनाने का आरोप लगाया।
सबसे दर्दनाक सच्चाई यह है कि सर्वेश पहले ही जीवन के संघर्षों से जूझ रहे थे। दो महीने पहले पत्नी की कैंसर से मौत, और अब उनके पांच वर्ष के जुड़वां बच्चे अहाना और अयांश अनाथ हो गए। यह घटना सिर्फ एक परिवार की त्रासदी नहीं, बल्कि एसआईआर अभियान की कार्यशैली पर गहरा सवाल है क्या मानवीय संवेदनाओं से ऊपर आंकड़े और रैंकिंग हो चुकी है?