गांधी उद्यान में क्रिकेट के साथ दोस्ती का भी जश्न
बरेली के गांधी उद्यान में ‘बोर्ड ऑफ कंट्रोल क्रिकेट’ ने पहली वर्षगांठ मनाई। दो-चार सदस्यों से शुरू हुआ सफर अब 25-30 सदस्यों के क्रिकेट परिवार तक पहुंच गया।
गांधी उद्यान में ‘बोर्ड ऑफ कंट्रोल क्रिकेट’ ने पहली वर्षगांठ मनाई।
दो-चार सदस्यों से शुरू हुआ सफर एक साल में 25-30 सदस्यों तक पहुंचा।
क्रिकेट के साथ फिटनेस, दोस्ती और आपसी भाईचारे को मजबूत करने का संकल्प।
जन माध्यम
बरेली। कुछ रिश्ते खून के नहीं होते, मगर वक्त के साथ दिल के बेहद करीब हो जाते हैं। कुछ सफर मंजिल से ज्यादा अपने साथ चलने वालों के लिए याद रखे जाते हैं। गांधी उद्यान में क्रिकेट के साथ शुरू हुआ ‘बोर्ड ऑफ कंट्रोल क्रिकेट’ का सफर भी अब ऐसे ही रिश्तों और यादों का हिस्सा बन चुका है। बुधवार को बोर्ड ने अपनी पहली वर्षगांठ धूमधाम से मनाई। सदस्यों ने केक काटकर खुशी साझा की और इस एक साल के सफर को यादगार बनाया।
करीब एक वर्ष पहले क्रिकेट खेलने का सिलसिला महज दो से चार लोगों से शुरू हुआ था। शुरुआत करने वालों में विकास बंसल, पुनीत शर्मा और सर्वेश रस्तोगी प्रमुख रूप से शामिल रहे। उस वक्त शायद किसी ने नहीं सोचा होगा कि छोटी सी शुरुआत इतनी जल्दी एक बड़े परिवार का रूप ले लेगी। आज बोर्ड से करीब 25 से 30 सदस्य जुड़े हैं।
यह सिर्फ संख्या बढ़ने की कहानी नहीं, बल्कि साथ आने, समय देने और एक-दूसरे से जुड़ने की दास्तान है। क्रिकेट ने सदस्यों को मैदान तक खींचा, लेकिन धीरे-धीरे यही मैदान दोस्ती, अपनापन और भाईचारे की खूबसूरत वजह बन गया।
बोर्ड से जुड़े सदस्य प्रत्येक रविवार और बृहस्पतिवार को गांधी उद्यान में क्रिकेट खेलते हैं। इन मुलाकातों का मकसद केवल बल्ले और गेंद के बीच मुकाबला करना नहीं है। नियमित खेल के जरिए खुद को फिट रखना, तनाव से दूर रहना और आपसी मेलजोल को मजबूत करना भी इसकी अहम कड़ी है।
सदस्यों का मानना है कि भागदौड़ भरी जिंदगी में खेल के लिए समय निकालना शरीर के साथ मन को भी तरोताजा करता है। मैदान पर बिताए कुछ घंटे दिनभर की थकान और व्यस्तता के बीच सुकून के पल बन जाते हैं।
पहली वर्षगांठ के मौके पर धीरेंद्र सिंह, मोनू भैया, गोपाल जोशी, हिमांशु जोशी, करण, कादिर गाजी, असित जैन और मीत गुप्ता समेत बोर्ड से जुड़े सदस्य मौजूद रहे। सभी ने एक-दूसरे को वर्षगांठ की मुबारकबाद दी और आने वाले समय में इस क्रिकेट परिवार को और बड़ा बनाने का संकल्प लिया।
सदस्यों ने कहा कि एक साल के सफर में क्रिकेट ने उन्हें केवल फिटनेस से नहीं जोड़ा, बल्कि दोस्ती और आपसी अपनापन भी बढ़ाया है। मैदान पर साथ खेलते-खेलते बने रिश्तों ने इस समूह को एक परिवार जैसा एहसास दिया है।
दो-चार लोगों से शुरू हुआ यह सफर आज 25-30 सदस्यों तक पहुंच चुका है। पहली वर्षगांठ पर चेहरे की मुस्कान और दिलों की खुशी इसी बात की गवाही देती रही कि कभी छोटी सी रखी गई नींव अब एक मजबूत रिश्ते की शक्ल ले चुकी है। सदस्यों ने उम्मीद जताई कि आने वाले वर्षों में यह कारवां और बढ़ेगा और क्रिकेट के साथ दोस्ती, फिटनेस और भाईचारे का यह सिलसिला यूं ही कायम रहेगा।